नई दिल्लीः भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट ने सवाल उठाया है कि बलूचिस्तान में मासूम बच्चों, महिलाओं और बेकसूर नागरिकों की हत्या किए जाने पर कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन बोल नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों से निर्दोष लोगों को निशाना बनाया गया लेकिन कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन और पश्चिमी मीडिया इस पर बोल नहीं रहा है। उन्होंने बलूचिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका और पश्चिमी देशों के रुख पर तब सवाल उठाया जब भारत को निशाने पर लिया जाता है।बहरहाल, लकी बिष्ट ने X पर लिखा, इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन कहां चला गया? वेस्ट की मीडिया कहां चली गई? जब बलूचिस्तान में मासूम बच्चों, महिलाओं और बेकसूर नागरिकों को JF-17 लड़ाकू विमानों से निशाना बनाया जा रहा है?
पूर्व रॉ एजेंट ने दावा किया कि 12-13 अगस्त को बलूचिस्तान के सुराब क्षेत्र स्थित गिदर ग्वन्धन (Gidar Goandhan) और खदान गांव में पाकिस्तानी वायुसेना के JF-17 जेट्स द्वारा की गई कथित बमबारी में 48 नागरिकों (12 बच्चे, 9 महिलाएं, 27 पुरुष) की मौत और 47+ लोगों के घायल होने की खबर है।लकी बिष्ट ने बताया कि पैटर्न और भौगोलिक फैलाव यह केवल सुराब तक सीमित नहीं है। खुज़दार (Khuzdar) जिले के ज़ेहरी (Zehri) इलाके में भी बीते महीनों में 3 से अधिक हवाई व ड्रोन हमले दर्ज किए गए हैं, जो यह साबित करता है कि नागरिक बस्तियों पर हवाई हमले अब एक व्यवस्थित नीति बन चुके हैं।
पूर्व खुफिया एजेंट का कहना है कि भू-राजनीतिक खेल और कॉर्पोरेट चुप्पी न तो दुनिया की तथाकथित सुपरपावर अमेरिका इस पर कुछ बोल रही है और न ही चीन। दोनों में से किसी को बलूच लोगों की ज़िंदगी से कोई सरोकार नहीं है; दोनों की नज़र सिर्फ़ बलूचिस्तान की उस ज़मीन पर है जहां अरबों डॉलर के सोने, तांबे और दुर्लभ खनिज पदार्थ दफ्न हैं।उन्होंने बताया कि सूचना का पूर्ण ब्लैकआउट खुजदार और आसपास के पूरे क्षेत्र में इंटरनेट शटडाउन और मीडिया पर सख्त पाबंदी लागू है, ताकि दुनिया तक जमीनी हकीकत और मानवाधिकार हनन के सबूत न पहुंच सकें।IHL का स्पष्ट उल्लंघन अपनी ही नागरिक आबादी पर फाइटर जेट्स से अंधाधुंध बमबारी अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (International Humanitarian Law) के तहत गंभीर युद्ध अपराध है।
