नई दिल्ली: अगर आप मुंबई में मकान खरीदने का सपना देख रहे हैं तो यह आपके लिए लंबी सजा हो सकता है। ऐसा मानना है एक एक्सपर्ट का। वेल्थ एडवाइजर अभिषेक के. ने कहा है कि भारत के मिडिल क्लास के लोग मुंबई में घर नहीं खरीद रहे, बल्कि वे झूठे वादों और गंदी समुद्री हवा वाले घरों के बदले जिंदगी भर की ईएमआई खरीद रहे हैं।
अभिषेक के. ने लिंक्डइन पर भारत के घर खरीदने के जुनून पर अपनी बात रखी है। बिजनेस टुडे के मुताबिक उन्होंने लिखा है, ‘यह सच्चाई है कि मिडिल क्लास भारत घर नहीं खरीद रहा। वह जिंदगी भर की ईएमआई खरीद रहा है।’ उन्होंने मुंबई के रियल एस्टेट को एक ऐसा जाल बताया है जो शहरी सफलता के नाम पर लोगों की आर्थिक आजादी छीन लेता है।
अभिषेक ने अपनी बात उदाहरण देकर समझाई। उन्होंने कहा कि मुंबई में एक साधारण 2-3 BHK फ्लैट की कीमत 3 से 8 करोड़ रुपये तक है। अगर 20% डाउन पेमेंट भी करें, तो परिवारों को 60 लाख से 1.6 करोड़ रुपये तुरंत देने होंगे। बाकी बचे 2 से 6.4 करोड़ रुपये का लोन लेना पड़ता है। 8.5% ब्याज दर पर हर महीने की ईएमआई 1.5 से 5.1 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यह रकम एक आम मिडिल क्लास की सैलरी से बहुत ज्यादा है।
अभिषेक लिखते हैं कि किफायती होने का अंतर बढ़ नहीं रहा है- यह तो किसी और ही दुनिया में है, जो तथाकथित लग्जरी है? उन्होंने लिखा कि लोग सी-व्यू लाइफस्टाइल के लिए करोड़ों रुपये देते हैं… लेकिन असल में उन्हें नम, प्रदूषित हवा मिलती है जो एक गंदे समुद्र से आती है, जिसमें लोग टॉयलेट करते हैं। उन्होंने इसे लग्जरी नहीं बल्कि सामूहिक भ्रम बताया है।
उन्होंने अपनी पोस्ट में देश के दूसरे हिस्सों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि जैसी शांत जगहों पर परिवार इसी कीमत के एक छोटे से हिस्से में 2,000 से 3,000 वर्ग फुट के बड़े बंगले बना रहे हैं। वहां बगीचे हैं, साफ हवा है, असली मोहल्ले हैं। अभिषेक कहते हैं कि यह एक ऐसी लाइफस्टाइल है जो मुंबई के ज्यादातर ‘अमीर’ लोगों के अनुभव से 10 गुना बेहतर है।
