वॉशिंगटन: अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा है कि ‘भारत दुनिया की महान शक्तियों में से एक है और शायद उनकी पूरी जिंदगी तक भारत ही रहेगा।’ उनका ये बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो इस महीने नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं। उन्होंने कहा “भारत दुनिया की महान शक्तियों में से एक है। इसमें कोई दो राय नहीं है।
भारत की आबादी अब दुनिया में सबसे ज्यादा है और शायद हमारी पूरी जिंदगी यही स्थिति बनी रहेगी।” इसके अलावा अमेरिका के उप विदेश मंत्री ने भारत को लेकर अपने सुर बदलते हुए भी दिखे हैं। उन्होंने कहा “अमेरिका भारत की सफलता की कहानी का हिस्सा बनना चाहता है। इस सदी के इतिहास में भारत की भूमिका बहुत बड़ी होने वाली है। वैश्विक मंच पर भारत के महत्व से हम भली-भांति अवगत हैं।”
SelectUSA इन्वेस्टमेंट समिट में बोलते हुए अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से रुका हुआ द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब पूरा होने के करीब है हालांकि इसकी कोई पक्की समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है। लैंडौ ने कहा “हम दुनिया के मंच पर भारत के महत्व से अच्छी तरह वाकिफ हैं। मुझे लगता है कि इस व्यापार समझौते का कोई अंतिम हल निकलना बहुत जरूरी है। हम महीनों से यह कहते आ रहे हैं कि हम इसके बहुत करीब हैं और मुझे भी लगता है कि हम वाकई बहुत करीब हैं। लेकिन हमें आखिरी रुकावट को पार करना होगा।”
आपको बता दें कि अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो 24 से 26 मई 2026 तक तीन दिन के ऑफिशियल दौरे पर भारत आने वाले हैं। विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा। इस दौरे का मकसद कई उच्च-स्तरीय मुलाकातों के जरिए भारत-अमेरिका की व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है। रूबियो विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात करेंगे और उम्मीद है कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलेंगे। इसके अलावा वो 26 मई को QUAD के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे जिसमें ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे।
मार्को रूबियो के दौरे से पहले उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ ने कार्यक्रम में ट्रेड डील को लेकर कहा “मेरे पास इस बारे में कोई बहुत बड़ी अंदर की जानकारी नहीं है कि यह कब आने वाला है लेकिन मैं बस इतना दोहरा सकता हूं कि मेरा मानना है कि हम इसके बहुत, बहुत करीब हैं। मुझे लगता है कि आखिरकार यह जरूरी है कि हम इस मामले को किसी नतीजे तक पहुंचाएं, इस पर दस्तखत करें और फिर अपने एजेंडे में शामिल कई दूसरे मुद्दों पर आगे बढ़ें।”
ट्रंप प्रशासन के आने के बाद से ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। पिछले साल के अंत में दोनों देश एक समझौते तक पहुंचे थे लेकिन फिर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को खत्म कर दिया। जिसके बाद भारत और अमेरिका के बीच नये सिरे से ट्रेड डील पर बातचीत शुरू हुई। दोनों ही पक्ष बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
इस समझौते के तहत भारत विशेष रूप से अमेरिकी बाजारों तक अपनी पहुंच को बेहतर बनाने के लिए काफी उत्सुक है वहीं दोनों देशों ने मिलकर 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य भी निर्धारित किया है।

