नई दिल्ली। दुनियाभर में जंगल की आग चिंता का विषय है। तमाम योजना बनाने के बाद भी जंगल की आग पर काबू पाना आसान नहीं होता है। अब फ्रांस के जंगलों में आग लगी हुई जो विशाल होती जा रहा है। इस बीच एक चिंताजनक घटना सामने आई है।जुलाई 2026 में फ्रांस में फायरफाइटर्स ने कुछ ऐसा देखा जो देश में पहले कभी दर्ज नहीं हुआ था। बोर्डो के पास जलते जंगल के ऊपर धुएं से भरा, एनविल (हथौड़े) जैसा काला बादल बना, जो अपनी खुद की बिजली पैदा कर रहा था।
यह था पायरोक्यूमुलोनिम्बस या फायर क्लाउड, जब जंगल की आग इतनी तेज हो जाती है कि वह सुपरहीटेड हवा का कॉलम आकाश में भेजती है, जो ठंडा होकर तूफानी बादल बन जाता है और उसी आग को और फैलाता है।फ्रांस के नेशनल फायरफाइटर्स फेडरेशन के प्रवक्ता के अनुसार, यह घटना देश में पहले कभी नहीं देखी गई। पहले यह घटना मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया (2019-20 बुशफायर) और उत्तरी अमेरिका (कैलिफोर्निया 2020) में ही दर्ज हुई थी। फ्रांसीसी शोधकर्ता जीन-बैप्टिस्ट फिलिप्पी कहते हैं कि ग्रह गर्म होने के साथ तूफानी परिस्थितियां और आग एक साथ आने के मौके बढ़ रहे हैं।
गिरोंड क्षेत्र में हफ्तों की भीषण गर्मी और सूखे के बाद शुरू हुई आग दो दिन में इतनी बड़ी हो गई कि उसका धुआं सामान्य नहीं रहा। शुक्रवार शाम विभाग के फायर एंड रेस्क्यू सर्विस ने पुष्टि की कि आग के ऊपर काला, एनविल-नुमा बादल बन गया है, जो कई किलोमीटर दूर बिजली गिराकर नई आग भड़का रहा था। रात में नमी बढ़ने से बादल कमजोर पड़ा, लेकिन आग जारी रहने पर कई बार दोबारा बना।यह काफी खतरनाक भी है। यह तेज और अनियमित हवाएं पैदा कर आग की दिशा बदल सकता है और दूर तक बिजली गिराकर नई आग लगा सकता है। यानी आग खुद अपना मौसम बना लेती है और नियंत्रण और मुश्किल हो जाता है।
भारत में अब तक कोई पायरोक्यूमुलोनिम्बस घटना दर्ज नहीं हुई है। लेकिन जलवायु परिवर्तन और जंगलों की आग का संबंध अब सैद्धांतिक नहीं रह गया है। बढ़ते तापमान, अनियमित मानसून और लंबे सूखे के कारण देश के जंगलों (जो भूमि का 21.67% हिस्सा हैं) में आग की आवृत्ति बढ़ रही है। लगभग 36 फीसदी जंगल क्षेत्र आवर्ती आग के लिए प्रवण है। उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा हाल के वर्षों में हॉटस्पॉट बने हैं।ओडिशा के कुछ हिस्सों में 20 फीसदी से अधिक क्षेत्र बहुत उच्च आग जोखिम में है। पश्चिमी हिमालय में ऊंचाई पर आग की घटनाएं बढ़ रही हैं और मध्य प्रदेश के खंडवा व उत्तर बैतूल क्षेत्रों में लगभग आधा इलाका आग-प्रवण है।
