बिना इंश्योरेंस के अब नहीं मिलेगा पेट्रोल-डीजल

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत पेट्रोल पंपों पर ईंधन की सप्लाई को गाड़ियों के इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ने का प्रस्ताव रखा। इस प्रोजेक्ट का मकसद मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जरूरी थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस के नियमों का पालन बेहतर बनाना है।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) को निर्देश दिया है कि वह सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के साथ मिलकर एक पायलट सिस्टम तैयार करे। इस सिस्टम के तहत, जिन गाड़ियों का इंश्योरेंस वैलिड नहीं है, उन्हें तब तक फ्यूल देने से मना किया जा सकता है, जब तक कि उनका इंश्योरेंस रिन्यू न हो जाए।

ये निर्देश नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई के दौरान जारी किए गए, जिसमें कोर्ट ने मोटर इंश्योरेंस कवरेज और सड़क सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों पर भी बात की। बेंच ने मंगलवार को निर्देश दिया कि कोर्ट में हुई चर्चा के आधार पर, IRDA को MoRTH के साथ मिलकर एक पायलट प्रोजेक्ट पर विचार करना चाहिए और उसे तैयार करना चाहिए, जिसके तहत गाड़ियों के लिए फ्यूल (ईंधन) को उनके वैलिड इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जा सके।

कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है, तो संबंधित गाड़ी को पेट्रोल पंप पर तब तक ईंधन नहीं दिया जाएगा, जब तक कि उसका वैध बीमा न हो जाए। फैसले के अनुसार प्रस्तावित सिस्टम के दो मकसद हैं। पहला, इससे बिना बीमा या बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों की पहचान करने में मदद मिलेगी। दूसरा, ईंधन भरवाने के लिए बीमा का होना जरूरी बनाकर, यह गाड़ी मालिकों को वैध बीमा कवरेज बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा।

कोर्ट ने कहा कि इस तरह के सिस्टम से मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत कानूनी जरूरत को लागू करने में मदद मिलेगी, जिसके तहत सभी गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रोजेक्ट को ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों के इस्तेमाल से लागू किया जा सकता है और बताया कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है।

कोर्ट का यह प्रस्ताव देश भर में अनिवार्य मोटर इंश्योरेंस को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए जारी किए गए निर्देशों का एक हिस्सा है। बेंच ने यह भी निर्देश दिया कि हाईवे और सड़कों पर लगे ANPR कैमरों को इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो डेटाबेस और VAHAN पोर्टल से जोड़ा जाए, ताकि बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों के लिए अपने-आप ई-चालान बन सकें। राज्य पुलिस कर्मियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे इंश्योरेंस की स्थिति की तुरंत जांच करने और नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने के लिए उन्हीं डेटाबेस से जुड़े हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करें।

कोर्ट ने इस बात पर चिंता जताई कि भारतीय सड़कों पर चलने वाले लगभग 56% वाहनों का इंश्योरेंस वैलिड नहीं है। संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, कोर्ट ने बताया कि 30.48 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं के कई पीड़ितों को समय पर मुआवजा नहीं मिल पाता और उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

बेंच ने सरकारी आंकड़ों का भी जिक्र किया, जिनके अनुसार 2024 में भारत में 4,87,705 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इससे सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने और यह पक्का करने के लिए सख्त नियमों को लागू करने की जरुरत पर जोर दिया गया कि अनिवार्य इंश्योरेंस व्यवस्था के जरिए पीड़ितों को उचित सुरक्षा मिले।

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