देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में तिब्बती समुदाय के लोगों ने जोरदार नारेबाजी के बीच प्रदर्शन करते हुए चीन के खिलाफ पैदल मार्च निकाला और तिब्बत को चीन से आजाद कराने की मांग उठाई. साथ ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर जान देने वाले लोबगा रांगजेन को श्रद्धांजलि दी. वहीं, तिब्बती युवा कांग्रेस के सदस्यों ने चीन की जमकर निंदा की है.
बता दें कि देहरादून में काफी संख्या में तिब्बती समाज के लोग रविवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में एकत्रित हुए. जहां पर उन्होंने शहीद लोबगा रांगजेन (Lobga Rangzen) के सम्मान में श्रद्धांजलि अर्पित की. उसके बाद विरोध मार्च निकालते हुए चीन से आजादी दिलाने की मांग उठाई. इस मौके पर थुपतन ने बताया कि यह अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन लोबगा के सबसे बड़े बलिदान का सम्मान करने के लिए है. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समाज की चेतना जगाने के लिए अपनी जान दे दी.
लोबगा ने दुनिया को यह बात याद दिलाने के लिए आत्महत्या कर लिया था कि तिब्बत एक कब्जा किया हुआ देश है. तिब्बती अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं. उनके बलिदान को नजरअंदाज करना या फिर दबाया या मिटाया नहीं जा सकता है. हम दृढ़ संकल्प रखते हैं कि उनकी आखिरी संदेश दुनियाभर में तब तक गूंजते रहेंगे, जब तक तिब्बती लोगों के आजादी के संघर्ष की तरफ ध्यान केंद्रित नहीं होता.
संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत पर ध्यानाकर्षण की अपील: वहीं, प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की तरफ से लागू किए गए तथाकथित एथनिक यूनिटी लॉ को भी साफतौर पर खारिज करते हैं. क्योंकि, यह कानून एकता का कानून नहीं है. बल्कि, एक राजनीतिक तरीका है. प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि लोबगा ने संयुक्त राष्ट्र के हेडक्वार्टर के सामने अपनी जान दी है. इसलिए हम संयुक्त राष्ट्र से अपील करते हैं कि वो तिब्बत में हो रहे मानवाधिकार की गंभीर स्थिति पर ध्यान दें.
इस दौरान देहरादून में मार्च निकालकर तिब्बती समाज ने ये संदेश देने की कोशिश की है कि तिब्बत को चीन से आजाद कराया जाए और भारत से इसके लिए समर्थन मांगा है. गौर हो कि लोबगा रांगजेन एक तिब्बती कार्यकर्ता थे, जिन्होंने जुलाई 2026 में अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर तिब्बत की आजादी के समर्थन में आत्मदाह कर लिया था.
बता दें कि तिब्बती समुदाय के लोग समय-समय पर चीन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते हैं. कभी तिब्बती समुदाय के 11वें पंचेन लामा की रिहाई की मांग को लेकर सड़कों पर उतरते हैं, तो कभी चीन की दमनकारी नीतियों के खिलाफ मुखर हो जाते हैं. इस बार लोबगा रांगजेन के आत्मदाह को लेकर प्रदर्शन किया.
