स्यूटा: स्पेन के छोटे से क्षेत्र स्यूटा में गुरुवार को उस समय बड़ा सीमा संकट खड़ा हो गया, जब मोरक्को की ओर से हजारों प्रवासी एक साथ बॉर्डर पार कर स्पेन के इलाके में पहुंच गए। इस मुस्लिम देश से स्पेन में घुसने की प्रवासियों की अफरा-तफरी में पिछले कुछ दिनों में कम से कम 60 लोगों के मारे जाने की खबर है। हालात इतने बिगड़ गए कि स्पेन सरकार ने सीमा पर व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना तैनात करने का फैसला किया। घटना के बाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने घोषणा की कि वह शुक्रवार को गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का के साथ स्यूटा का दौरा करेंगे।
बता दें कि स्यूटा (Ceuta) उत्तरी अफ्रीका के तट पर स्थित स्पेन का एक छोटा-सा क्षेत्र है। यह मोरक्को से घिरा हुआ है, लेकिन प्रशासनिक रूप से स्पेन का हिस्सा है। इसलिए यहां पहुंचने वाला व्यक्ति यूरोपियन यूनियन के बॉर्डर तक पहुंच जाता है। बेहतर रोजगार, सुरक्षित जीवन और हिंसा से बचने की उम्मीद में अफ्रीका के कई देशों के लोग यहां पहुंचने की कोशिश करते हैं। गुरुवार की सुबह अचानक बड़ी संख्या में लोग मोरक्को की तरफ से बॉर्डर पार करने लगे। कई लोग तराजाल (Tarajal) बीच के ब्रेकवॉटर के रास्ते पैदल स्पेन की सड़कों तक पहुंच गए। इनमें ज्यादातर युवा पुरुष थे, लेकिन महिलाओं और छोटे बच्चों वाले परिवार भी इस भीड़ में शामिल थे।
अधिकारियों ने अभी तक सटीक संख्या नहीं बताई है, लेकिन स्थानीय अधिकारियों के अनुसार हजारों लोग सीमा पार कर चुके हैं। कुछ लोग सीमा पार करते समय ‘वीवा एस्पान्या’ यानी कि स्पेन जिंदाबाद के नारे भी लगा रहे थे। बता दें कि इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है।उत्तरी मोरक्को के मानवाधिकार संगठन के सदस्य अशरफ मैमूनी ने इस स्थिति को ‘असाधारण’ बताया। उन्होंने कहा कि आज सुबह तराजाल बॉर्डर असामान्य परिस्थितियों में खोला गया और लोग बड़ी संख्या में सीमा पार करने लगे। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि बॉर्डर को इस तरह क्यों खोला गया। स्यूटा में स्पेन सरकार के प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक इस ताजा अफरा-तफरी के दौरान 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि पिछले कुछ दिनों में कुल मिलाकर 60 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। अधिकारियों ने मौतों की वजह का विस्तार से खुलासा नहीं किया, लेकिन समुद्र में कई लाशें तैरती देखी गईं।
स्यूटा प्रशासन ने मैड्रिड स्थित केंद्र सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बल और सेना भेजने की मांग की थी। इसके बाद स्पेन सरकार ने घोषणा की कि आर्मी को सिविल गार्ड की मदद के लिए भेजा जाएगा ताकि शहर में सुरक्षा व्यवस्था बहाल की जा सके। स्यूटा के क्षेत्रीय प्रमुख जुआन जीसस विवास ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए नेशनल इमरजेंसी घोषित करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि सीमा की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस और सेना की जरूरत है। स्पेन के गृह मंत्रालय ने उनकी मांग को ठुकराते हुए कहा,’देश के कानून के मुताबिक प्रवासियों के बड़े पैमाने पर आने को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा ऐसा खतरा नहीं माना जाता, जिसके आधार पर इमरजेंसी घोषित किया जा सके।’
मोरक्को सरकार ने इस घटना पर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है और न ही गृह मंत्रालय ने मीडिया के सवालों का जवाब दिया। हालांकि स्पेन के गृह मंत्रालय का कहना है कि मोरक्को सरकार इस संकट से निपटने में सहयोग कर रही है। मोरक्को की पुलिस कई लोगों को सीमा पार करने से रोक रही है। दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई है कि जो लोग अवैध तरीके से स्यूटा पहुंचे हैं, उन्हें जल्द से जल्द वापस भेजने के लिए मिलकर काम किया जाएगा।
मोरक्को से स्पेन में अचानक इतनी बड़ी संख्या में लोगों की कोई स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। बुधवार से ही समुद्र के रास्ते तैरकर स्यूटा पहुंचने की कोशिश करने वालों की संख्या बढ़ रही थी। स्यूटा प्रशासन का मानना है कि इसकी एक वजह स्पेन के सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला हो सकता है। अदालत ने इस महीने कहा था कि समुद्र के रास्ते पहुंचने वाले प्रवासियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी किए बिना तुरंत वापस नहीं भेजा जा सकता, जबकि जमीन के रास्ते सीमा पार करने वालों के मामले में अलग नियम लागू हो सकते हैं। हालांकि मोरक्को के कुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अधिकांश प्रवासियों को इस कानूनी फैसले की जानकारी ही नहीं होगी, इसलिए केवल इसे वजह नहीं माना जा सकता।
बता दें कि यह पहली बार नहीं है जब स्पेन के सामने आया संकट सामने आया है। मई 2021 में भी 2 दिनों के भीतर 8000 से ज्यादा प्रवासी स्यूटा में घुस गए थे। उस समय मोरक्को पर आरोप लगा था कि उसने सीमा पर निगरानी जानबूझकर ढीली कर दी थी। यह विवाद तब पैदा हुआ था जब स्पेन ने पोलिसारियो फ्रंट के नेता ब्राहिम घाली को अपने अस्पताल में इलाज की इजाजत दी थी। इसके बाद मोरक्को और स्पेन के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया था। पोलिसारियो फ्रंट लंबे समय से पश्चिमी सहारा के सहरावी लोगों का प्रतिनिधि होने का दावा करता है, जबकि इस क्षेत्र पर मोरक्को भी अपना दावा करता है।
स्यूटा प्रशासन ने बुधवार को ही चेतावनी दी थी कि पिछले एक सप्ताह में 1500 से अधिक प्रवासी पहुंचने के कारण स्वागत केंद्र पूरी तरह भर चुके हैं और सैकड़ों लोग सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हैं। इसके बाद गुरुवार रात और सुबह हजारों अन्य लोगों के पहुंचने से हालात और ज्यादा गंभीर हो गए। स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, 15 जुलाई तक इस वर्ष लगभग 3000 प्रवासी समुद्र और जमीन के रास्ते स्यूटा पहुंच चुके थे। मंत्रालय ने कहा कि अगली आधिकारिक प्रवासन रिपोर्ट 3 अगस्त को जारी की जाएगी।
फिलहाल स्पेन ने सीमा पर सेना तैनात करने का फैसला किया है और प्रधानमंत्री स्वयं हालात का जायजा लेने स्यूटा पहुंच रहे हैं। दूसरी ओर, स्पेन और मोरक्को दोनों अवैध रूप से पहुंचे लोगों की वापसी और सीमा पर नियंत्रण मजबूत करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमत हैं। हालांकि, हजारों लोगों के अचानक सीमा पार करने की असली वजह अब भी पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।
