ढाका: बांग्लादेश आर्मी एविएशन ग्रुप भारत के चिकन नेक के करीब लालमोनिरहाट एयर बेस पर एक एयर डिफेंस और रडार सिस्टम लगा रहा है। इस एयर बेस पर पिछले साल के आखिर में एक विशाल हैंगर का काम पूरा किया गया था जिसे मोहम्मद यूनुस के समय में शुरू किया गया था। नॉर्थईस्ट न्यूज ने कम से कम दो सैन्य सूत्रों के हवाले से इसकी पुष्टि की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस एयर बेस की सुरक्षा को काफी बढ़ा दिया गया है। आपको बता दें कि यह एयर बेस बांग्लादेश-भारत सीमा से 20 किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है जो पश्चिम बंगाल के कूच बिहार जिले से सटा हुआ है। संवेदनशील रक्षा उपकरणों की तैनाती को देखते हुए सुरक्षा के ये इंतजाम किए गए हैं।
आपको बता दें कि यह हैंगर रंगपुर डिवीजन के लालमोनिरहाट स्थित महेंद्रनगर यूनियन के हरिभंगा गांव में स्थित है। इसके अलावा यह एयरबेस 1,166 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका रनवे 4 किलोमीटर लंबा है। इसे मूल रूप से 1931 में बनाया गया था और दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद यह एयरबेस कई दशकों तक वीरान ही पड़ा था। हालांकि 1971 की लड़ाई में पाकिस्तानी सैनिकों ने इस एयरबेस का इस्तेमाल किया था।
बांग्लादेश आर्मी एविएशन ग्रुप की एयर डिफेंस और रडार सिस्टम लगाने की योजनाओं के बारे में पिछले साल नवंबर में नॉर्थईस्ट न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी थी। उस समय नये रडार सिस्टम के पुर्जे ट्रकों से इस एयरबेस पर पहुंचाए गये थे। ये सारे काम मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान ही हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक एयरबेस पर पुराने हो चुके सिस्टम की जगह लेने वाले डिफेंस रडार सिस्टम को लगाने के लिए एक कंक्रीट प्लेटफॉर्म और उसके हिसाब से एक बिल्डिंग बनाने की योजनाएं तैयार की गईं।
हालांकि भारतीय सैन्य सूत्रों को एयर डिफेंस और रडार लगाने की प्रक्रिया के बारे में पहले से ही जानकारी है। उन्होंने बांग्लादेश एयर फोर्स के बोगुरा एयरबेस के अपग्रेडेशन पर चिंता जताई जहां भी एक एयर डिफेंस और रडार सिस्टम लगाने का काम चल रहा है। सूत्रों ने ये भी बताया है कि ये सब अमेरिका की मदद से किए जा रहे हैं। हालांकि इससे ज्यादा जानकारी देने से उन्होंने इनकार कर दिया। आपको बता दें कि रडार सिस्टम्स लगाने से सीमावर्ती क्षेत्र में भारतीय एयरफोर्स की गतिविधियों की जानकारी बांग्लादेश को मिल सकेगी।एक मिलिट्री-ग्रेड रडार सिस्टम के मुख्य हिस्सों में एक ट्रांसमीटर, एंटीना, एक रिसीवर और एक प्रोसेसर शामिल होते हैं। इनके अलावा कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर, ट्रैकिंग सिस्टम और हथियार लॉन्च करने वाले सिस्टम जैसे दूसरे जरूरी हिस्से भी इसमें होते हैं।
भारतीय अधिकारियों ने न तो हैंगर के निर्माण पर और न ही एयर डिफेंस और रडार सिस्टम की स्थापना पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। लेकिन ऐसा लगता है कि बांग्लादेश की सेना लालमोनिरहाट एयरफील्ड का “सैन्य उद्देश्यों” के लिए उपयोग न करने के अपने ही वादे का उल्लंघन कर रही हैं। यह वादा तत्कालीन ब्रिगेडियर जनरल नाज़िम-उद-दौला ने 26 मई 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया था। भारत के विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने 8 अगस्त 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में बताया था “भारत सरकार ने बांग्लादेश में लालमोनिरहाट एयरबेस से संबंधित रिपोर्टों का संज्ञान लिया है”।
बांग्लादेश ने पिछले साल अक्टूबर महीने में इस एयरबेस पर हैंगर बनाने का काम शुरू किया था। यह एयरबेस भारत के संवेदनशील ‘चिकन नेक’ या उत्तरी बंगाल में स्थित सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब है। पिछले साल 16 अक्टूबर को मेजर जनरल कुंदन कुमार सिंह के नेतृत्व में भारतीय मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम बांग्लादेश सेना प्रमुख जनरल वकार-उज़-ज़मान के साथ लालमोनिरहाट एयरबेस और पास के ठाकुरगांव एयरफील्ड के दौरे पर गई थी। इसके अलावा रक्षा मंत्रालय के अधीन बांग्लादेश के मिलिट्री लैंड कैंटोनमेंट विभाग ने 26 जून 2025 को शिवगंज में स्थित ठाकुरगांव एयरफील्ड पर ऑपरेशन “फिर से शुरू करने” का आदेश जारी किया था।

