ईरान-अमेरिका का बदला रुख

नई दिल्लीः अमेरिका और ईरान के बीच सीधा संघर्ष रुका है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी से तनाव बढ़ गया है। दोनों पक्ष उकसाने वाले बयान दे रहे हैं और समुद्री आवाजाही ठप है। अमेरिका आर्थिक दबाव बना रहा है, पर ईरान पर असर सीमित है। लंबे गतिरोध से वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल आपूर्ति और आम लोगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल के बाद से कोई सीधा संघर्ष नहीं हुआ है। पिछले दिनों जब दो हफ्ते का संघर्षविराम खत्म हुआ, तो तमाम धमकियों के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने इसे और आगे खिसका दिया। इससे लगा कि तनाव के बावजूद दोनों पक्ष शांति चाहते हैं। हालांकि अब यह लड़ाई होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी के रूप में दूसरा रूप ले चुकी है और ट्रंप के ताजा आदेश के बाद गतिरोध और गहरा सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने आदेश दिया है कि अगर कोई ईरानी नाव होर्मुज में बारूदी सुरंग बिछाती मिलती है, तो उसे देखते ही उड़ा दिया जाए। इससे पहले ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि उनके सैनिक होर्मुज के पास गुफाओं में तैयार बैठे हैं। इन बयानों से जाहिर है कि दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को उकसा रहे हैं। लेकिन, जब हालात इतने तनावपूर्ण हों, तब ऐसे कदम गंभीर रूप ले सकते हैं।

होर्मुज से इस समय आवाजाही बिल्कुल ही बंद है। अमेरिकी नौसेना ने तेहरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर रखी है, और बदले में ईरान भी किसी जहाज को खाड़ी पार करने नहीं दे रहा। इस तरह की स्थिति तब भी नहीं बनी थी, जब जंग चल रही थी। उस दरम्यान बीच-बीच में कुछ जहाजों को होर्मुज से गुजरने की इजाजत मिल गई थी।

अमेरिका और ईरान एक-दूसरे के हद की परीक्षा ले रहे हैं और इसकी कीमत दुनिया को चुकानी पड़ रही है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उसकी नाकेबंदी की वजह से तेहरान को हर दिन 50 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। आर्थिक दबाव बनाकर ट्रंप अपनी शर्तों पर ईरान को बातचीत की मेज पर लाना चाहते हैं। लेकिन, बरसों के पश्चिमी प्रतिबंधों ने ईरान को इन हालात का आदि बना दिया है। ट्रंप जितना दबाव बनाएंगे, प्रतिरोध की भावना उतनी ही प्रबल होगी।

सैन्य टकराव से दोनों पक्ष जितना हासिल कर सकते थे, कर लिया। अमेरिका ने जिन लक्ष्यों को लेकर जंग छेड़ी थी, वे अब भी दूर हैं और उसे पता है कि लड़ाई से उसे पूरा नहीं कर सकते। इसी तरह ईरान को भी अंदाजा होगा कि वह ट्रंप की जिद को एक सीमा तक ही झुका सकता है। ऐसे में एक ही रास्ता बचता है, शांति। तेल और नैचुरल गैस को लेकर इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी की चेतावनी, कि इनकी सप्लाई 2027 तक भी सामान्य नहीं होगी, जंग के गंभीर नतीजों का बस एक पहलू है। गतिरोध लंबा खिंचने से वैश्विक मंदी आ सकती है, जिसकी सबसे ज्यादा कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *