पिथौरागढ़ के दारमा घाटी में दरकी पहाड़ी

पिथौरागढ़: धारचूला की दारमा घाटी में निर्माणाधीन सोबला-ढाकर सड़क पर विशालकाय चट्टानें गिरने से रविवार को दिन भर यातायात ठप रहा. पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण सड़क नहीं खोली जा सकी. इससे पंचाचूली ट्रेक पर आए पर्यटकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा.

बता दें कि बीआरओ यानी सीमा सड़क संगठन की ओर से सोबला से ढाकर तक सड़क बनाई जा रही है. रविवार को पंग्बाबे नामक स्थान पर चट्टान को तोड़ने के लिए ब्लास्टिंग की गई. इससे पहाड़ी से भारी बोल्डर गिरने लगे. विशालकाय बोल्डर गिरने से पूरे दिन सड़क बंद रही.यातायात बाधित होने के कारण पंचाचूली के लिए आवाजाही कर रहे पर्यटक दोनों ओर फंसे रहे. पर्यटकों ने अपराह्न चार बजे तक सड़क खुलने का इंतजार किया. जब सड़क खुलने के आसार नजर नहीं आए, तो दोनों ओर फंसे यात्री सुरक्षित स्थानों पर चले गए.

लगातार बोल्डर गिरने के कारण सड़क खोलने का कार्य नहीं हो पाया. पहाड़ी से जैसे ही पत्थर गिरने बंद होंगे, वैसे ही सड़क खोल दी जाएगी. स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और ग्रामीणों ने बीआरओ से पर्यटक सीजन में ब्लास्टिंग न करने की अपील की है.लोगों का कहना है कि इस समय पंचाचूली देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक आ रहे हैं. इसके अलावा 14 गांवों के लोग भी माइग्रेशन पर दारमा घाटी में आए हैं. यदि इसी तरह सड़क बंद रही तो पर्यटन कारोबार प्रभावित होगा.

“मार्ग को खोलने के लिए लगातार बीआरओ की ओर से दो अतिरिक्त मशीनें लगाई है. वर्तमान में जो पर्यटक फंसे हुए थे, उनको भी निकाल गया है. वर्तमान तक कोई भी पर्यटक नहीं फंसा हुआ है. मार्ग खोलने के लिए युद्ध स्तर पर कार्य किया जा रहा.पंचाचूली में पत्थर की चपेट में आए भेड़पालक का रेस्क्यू: पंचाचूली के फुगागैर में पत्थर की चपेट में आने से घायल भेड़पालक का एसडीआरएफ के जवानों ने रेस्क्यू कर लिया है. घायल को मुनस्यारी लाने के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया है.

जानकारी के मुताबिक, फाफा गांव निवासी खीम सिंह भेड़ चराने के लिए पंचाचूली के फुगागैर क्षेत्र में गया था. 5 जून को पहाड़ी से गिरे पत्थर की चपेट में आने से वो गंभीर रूप से घायल हो गया था.चलने-फिरने में असमर्थ होने के कारण उसका बिना सहायता के वापस आना संभव नहीं था. यूथ कांग्रेस अध्यक्ष बिक्रम दानू ने प्रशासन से हेलीकॉप्टर की व्यवस्था करने या एसडीआरएफ की टीम भेजने की मांग की थी.

प्रशासन की ओर से सूचना मिलने के बाद एसडीआरएफ के सेनानायक अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर एसडीआरएफ पोस्ट अस्कोट से मुख्य आरक्षी सुनील चंद के नेतृत्व में रेस्क्यू टीम आवश्यक उपकरणों के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हुई.खराब मौसम के बावजूद जवान चलकर करीब 30 से 35 किलोमीटर दूर दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में पहुंचे. जहां घायल भेड़पालक खीम सिंह का रेस्क्यू किया. जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है. जहां उसका उपचार चल रहा है.

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