नई दिल्ली। भारत में अगले साल से 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक के नोट चलन में आ सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) परियोजना के पहले चरण में भाग लेने के लिए वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं को आमंत्रित करके एक पायलट प्रोजेक्ट रोलआउट की तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है।
पॉलीमर नोटों की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में, RBI की मुद्रा-मुद्रण सहायक कंपनी, भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड ने टेंडर जारी किया है, जिसमें दुनिया भर के निर्माताओं को भारतीय बैंक नोटों की छपाई (India may get plastic currency) के लिए सुरक्षा सुविधाओं के साथ एम्बेडेड ओपसीफाइड पॉलिमर सब्सट्रेट शीट की आपूर्ति करने के लिए आमंत्रित किया गया है। आरबीआई ने विदेशी कंपनियों को इसलिए आमंत्रित किया है, क्योंकि भारत में प्लास्टिक नोट की शीट बनाने वाली कंपनियां नहीं है।अगर प्लास्टिक नोटों को बनाने की यह कोशिश सफल होती है, तो यह भारत की पिछले 16 सालों में तीसरी कोशिश होगी। भारत में पहली बार प्लास्टिक नोटों को बनाने की प्रक्रिया साल 2010 में शुरू की गई थी। 2013-14 तक इस पर काम भी चला। लेकिन कई कारणों से उस समय यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका।
इसके बाद सरकार ने दूसरी बार मार्च 2017 में 10 रुपये के प्लास्टिक/पॉलीमर नोट के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। सरकार ने नोट छापने के लिए पॉलीमर शीट खरीदने के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी थी। लेकिन इसके बावजूद यह कोशिश नाकाम रही।इन दो कोशिशों के नाकाम रहने के पीछे के कई कारण रहें। जैसे भारत में नोटों की गिनती करने वाली मशीन कागज की नोटों के हिसाब से बनीं थी। ये मशीनें पॉलीमर नोटों की गिनती नहीं कर पातीं। मशीनों को बदलने की लागत बहुत अधिक आती।
अब तीसरी कोशिश पर सभी की निगाहें टिकी है। तीसरी कोशिश के सफल होने की गुंजाइश अधिक है, क्योंकि इस बार पॉलीमर शीट इंपोर्ट करने के लिए नहीं, बल्कि नोट छांपने वाली कंपनियों को बुलाया गया है, ताकि वो भारत में आकर पॉलीमर नोटों का निर्माण कर सकें। आरबीआई ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए जो टेंडर निकाला है, उसकी बोली लगाने की अंतिम तारीख 18 अगस्त हैं। रिपोर्ट के अनुसार, टेंडर में कहा गया है कि वर्तमान खरीद केवल तत्काल आवश्यकता के लिए है और यदि फील्ड परीक्षण सफल साबित होते हैं तो अधिक मूल्यवर्ग को कवर करने वाले बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है। या
नी अभी जो टेंडर निकाला गया है वह सिर्फ ट्रायल के लिहाज से निकाला गया है। अगर ट्रायल सफल रहता है तो आगे पॉलीमर नोटों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक बड़ा टेंडर निकालेगा।RBI ने पायलट प्रोजेक्ट के लिए नोटों की वैल्यू के बारे में आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा नहीं की है। हालांकि, जून में हुई मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि पॉलीमर बैंकनोट्स के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है और सेंट्रल बैंक कोई अंतिम फैसला लेने से पहले इसके फायदों और व्यवहार्यता की जांच कर रहा है।
भारत में इस समय 10 और 20 रुपये के नोटों संख्या अधिक है। ये नोट सबसे अधिक प्रचलन में रहते हैं और ये जल्दी खराब भी हो जाते हैं। नोट खराब होने के चलते हर साल में इन्हे बड़ी संख्या में बदलना पड़ता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 6372.8 करोड़ रुपये नोटों की छपाई पर खर्च किए। और 23.8 अरब के खराब नोटों को नष्ट करना पड़ा।यही कारण है कि 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक के नोटों का पॉयलट प्रोजेक्ट शुरू किया जा रहा है। क्योंकि प्लास्टिक के नोट अधिक टिकाऊ होते हैं और ये जल्दी खराब नहीं होते, जिससे इन्हें हर साल बदलना नहीं पड़ेगा।
