शीतकाल के लिए बंद हुए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट

छह माह तक गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में होंगे भगवान के दर्शन

चमोली। पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट विधि-विधान और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। इस पावन अवसर पर सैकड़ों श्रद्धालु साक्षी बने। भगवान रुद्रनाथ के जयकारों से संपूर्ण मंदिर परिसर गूंज उठा। कपाट बंद होने के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित इस धाम की यात्रा शीतकाल के लिए स्थगित हो गई है।

कपाट बंद होने की प्रक्रिया के तहत मंदिर में भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पंडित आचार्य हरीश भट्ट ने भगवान का अभिषेक और श्रृंगार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान रुद्री पाठ भी किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मुख्य पुजारी ने भगवान के विग्रह की पूजा-अर्चना के बाद रात्रि आठ बजे मंदिर के मुख्य गर्भगृह के कपाट बंद किए। इस भावुक पल के दौरान श्रद्धालुओं और हक-हकूकधारियों ने भगवान के जयकारों के साथ विदाई दी।

कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली की शीतकालीन यात्रा शुरू होगी। 18 अक्टूबर को डोली ज्वाला मंदिर, देवलधार में रात्रि प्रवास करेगी। इसके बाद 19 अक्टूबर को डोली गोपेश्वर स्थित भगवान गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी। यहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान रुद्रनाथ को शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान कराया जाएगा।

अगले छह महीनों तक श्रद्धालु गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में ही भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। उल्लेखनीय है कि भगवान रुद्रनाथ के मंदिर में भगवान शिव के मुखारविंद की पूजा की जाती है। अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित इस धाम में शीतकाल के दौरान भारी बर्फबारी और कड़ाके की ठंड के कारण यात्रा संभव नहीं रहती। कपाट बंद होने के साथ ही अब श्रद्धालु शीतकालीन गद्दीस्थल पर भगवान की आराधना करेंगे।

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