डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने ली उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने लोकभवन में दिलाई शपथ, मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं बिसेन
देहरादून। डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने सोमवार को उत्तराखंड के राज्यपाल पद की शपथ ली। लोकभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उत्तराखंड हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके बिसेन को उत्तराखंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वह पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन रविवार शाम देहरादून पहुंचे थे। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर उत्तराखंड पुलिस ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इस दौरान उन्होंने परेड का निरीक्षण भी किया। लोकभवन पहुंचने पर राज्यपाल सचिव रविनाथ रमन, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल केके शुक्ला, सचिव प्रोटोकॉल विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल मंडलायुक्त आनंद स्वरूप, आईजी विम्मी सचदेवा रमन और अपर सचिव रीना जोशी सहित अन्य अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन का जन्म मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के पिपरिया गांव में हुआ। पेशे से आयुर्वेद एवं होम्योपैथी के चिकित्सक होने के साथ वह किसान भी हैं। उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वह मध्य प्रदेश की बरघाट विधानसभा सीट से चार बार विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2003 से 2005 तक मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। इसके बाद वर्ष 2011 से 2013 तक मध्य प्रदेश राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर बालाघाट संसदीय सीट से जीत दर्ज कर वह 17वीं लोकसभा के सदस्य बने। वर्ष 2024 तक उन्होंने सांसद के रूप में कार्य किया।

डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह का स्थान लिया है। गुरमीत सिंह उत्तराखंड में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल के पद पर रहने का रिकॉर्ड बना चुके हैं। उन्होंने पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल के नाम दर्ज रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा था। गुरमीत सिंह ने 5 जुलाई 2026 को राजभवन, जिसे अब लोकभवन कहा जाता है, में अपने कार्यकाल के 1,755 दिन पूरे किए थे। इसके अगले दिन वह उत्तराखंड में सबसे लंबे समय तक राज्यपाल रहने वाले व्यक्ति बन गए थे।अब डॉ. ढाल सिंह बिसेन के सामने राज्यपाल के रूप में उत्तराखंड की संवैधानिक जिम्मेदारियों के निर्वहन और प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपनी भूमिका निभाने की चुनौती होगी।

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