झंडे जी के मेले में कोरोना का खौफ नदारद

देहरादून। कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन कराने में अधिकारियों के पसीने छूट गए। झंडे जी के आरोहण का साक्षी बनने की होड़ में श्रद्धालु आपस में शारीरिक दूरी बनाए रखना भी भूल गए, जबकि कोरोना से सुरक्षा के लिए शारीरिक दूरी के नियम का पालन बेहद जरूरी है। आलम यह था कि पुलिस-प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं को काबू करना मुश्किल साबित हुआ।

सुबह झंडे जी को उतारने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही इस सुअवसर का दीदार करने के लिए झंडे जी के समक्ष श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। जैसे-जैसे रस्में आगे बढ़ीं, श्रद्धालुओं की भीड़ का आकार भी बढ़ता गया। जैसे ही झंडे जी का आरोहण शुरू हुआ, उन्हें छूने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लग गई। इस कोशिश में कोविड-19 से बचाव के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश तार-तार हो गए। कई श्रद्धालु तो मास्क तक नहीं पहने थे।

किसी ने चुन्नी तो किसी ने पगड़ी से आधा-अधूरा मुंह ढक रखा था। कई श्रद्धालुओं के मास्क नाक से नीचे खिसके हुए थे। झंडे जी का आरोहण होने के बाद श्रद्धालु उनके चारों ओर खड़े हो गए। इस दौरान भी भीड़ प्रबंधन मुश्किल हो गया। दरबार साहिब के मुख्य परिसर के बरामदे में भी श्रद्धालुओं की भीड़ के आगे कोविड-19 गाइडलाइन की एक नहीं चली।

झंडे जी के मेले में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को कोरोना की आरटी-पीसीआर जांच की निगेटिव रिपोर्ट लाना अनिवार्य था। लेकिन, शुक्रवार को एकाएक दरबार साहिब में भीड़ उमड़ी तो रिपोर्ट जांचने के लिए बनाई गई व्यवस्था ध्वस्त हो गई। मुख्य गेट पर ही पुलिस कुछ देर खड़ी रही। भीड़ बढ़ने पर पुलिस भी गेट से दूर हट गई। हालांकि, श्री झंडा जी मेला कमेटी का कहना है कि पूर्व में ही सभी श्रद्धालुओं की कोरोना निगेटिव रिपोर्ट जांच ली गई थी।

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