भूकंप से 252 की मौत,7060 लोगों ने छोड़ा अपना घर

जकार्ता। इंडोनेशिया के पश्चिमी जावा प्रांत में सोमवार को 5.6 तीव्रता से आए भूकंप में अब तक 252 लोगों की जान चली गई है। स्‍थानीय प्रशासन के मुताबिक, मरने वालों की संख्‍या बढ़ सकती है, क्‍योंकि 31 लोग अब भी लापता हैं और 377 लोग घायल हैं।

वहीं, 7060 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। राहत एजेंसियां बचाव कार्यों में जुटी हैं, और आपदा पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इंडोनेशिया में भूकंप से हुई तबाही को लेकर दुख जताया है।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया कि इंडोनेशिया में भूकंप से जान-माल के नुकसान की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। पीड़ितों और उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदना। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं। दुख की इस घड़ी में भारत इंडोनेशिया के साथ खड़ा है।

वेस्ट जावा के गवर्नर रिदवान कामिल ने इससे पहले आपदा में 162 लोगों के मरने की पुष्टि की थी। उन्‍होंने ने बताया कि भूकंप का केंद्र राष्ट्रीय राजधानी जकार्ता से दक्षिणपूर्व 75 किलोमीटर दूर सियांजुर शहर था।

भूकंप के चलते 700 से अधिक लोग घायल हुए हैं और 300 से अधिक घर नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं। सियांजुर के एक अधिकारी हरमन सुहेरमैन ने बताया कि क्षेत्र में बिजली गुल हो गई है और संचार माध्यम बाधित हो गए हैं।

इसके साथ ही अधिकारी ने बताया कि क्यूजेनांग क्षेत्र में भूस्खलन के कारण लोगों को नहीं निकाला जा सका है। न्यूज चैनल मेट्रो टीवी की फुटेज में दिखाया गया है कि सियांजुर के एक हास्पिटल की बिल्डिंग के साथ उसकी पार्किंग में सैकड़ों घायलों का इलाज किया जा रहा है। सियांजुर निवासी मुशिल्स बताते हैं कि जब भूकंप आया तो तेज कंपन से वह गिर गए और उनके आफिस की छत और दीवार क्षतिग्रस्त हो गई।

मुशिल्स ने कहा कि वह दूसरे भूकंप आने की आशंका से डर गए। बीएमकेजी के अनुसार, भूकंप के दो घंटे के भीतर 25 बार कंपन महसूस किए गए। इंडोनेशिया में 2004 में 9.1 तीव्रता के भूकंप से आई सुनामी से सुमात्रा द्वीप में दो लाख 26 हजार लोगों की मौत हुई थी। इस सुनामी का असर 14 देशों में हुआ था।

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