देहरादून: उत्तराखंड में जंगलों को अवैध अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए वन विभाग अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है. विभाग ने जंगलों में अवैध अतिक्रमण की निगरानी के लिए ड्रोन टेक्नोलॉजी के व्यापक इस्तेमाल का फैसला किया है. इसके तहत सभी वन प्रभागों में ड्रोन के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी, ताकि किसी भी नए अतिक्रमण की जानकारी समय रहते मिल सके और तत्काल कार्रवाई की जा सके.
दरअसल राज्य में पिछले लगभग तीन वर्षों से वन भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के दौरान सैकड़ों हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमणकारियों से खाली कराया गया है. हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे क्षेत्र हैं जहां अवैध कब्जे बने हुए हैं. कई मामलों में कानूनी प्रक्रिया और न्यायालयों में लंबित मामलों के कारण कार्रवाई प्रभावित हो रही है.
वन विभाग अब केवल अवैध अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि जिन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है, वहां दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए भी विशेष रणनीति बनाई गई है. इसी उद्देश्य से ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है. ड्रोन के जरिए संवेदनशील वन क्षेत्रों की नियमित निगरानी होगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे.ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग के लिए वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.
प्रशिक्षण के दौरान उन्हें ड्रोन संचालन, तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा मानकों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी जा रही है. साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि किन क्षेत्रों में ड्रोन उड़ाए जा सकते हैं और उनके संचालन के दौरान किन नियमों का पालन करना आवश्यक है. विभाग का मानना है कि प्रशिक्षित वनकर्मी तकनीक की मदद से निगरानी व्यवस्था को पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बना सकेंगे.यदि राज्य में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्तमान में लगभग 11,100 हेक्टेयर वन क्षेत्र अवैध कब्जे की जद में है.
इनमें से अभियान चलाकर अब तक 1,491.96 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जा चुका है. सबसे अधिक अतिक्रमण तराई पश्चिमी वन क्षेत्र में दर्ज किया गया है, जहां 2,629 हेक्टेयर वन भूमि पर अवैध कब्जा है. इसी क्षेत्र में अभियान के दौरान सबसे अधिक 532.96 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त भी कराया गया है.वन विभाग के अनुसार, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया गया.
बैठक में निर्णय लिया गया कि ड्रोन आधारित निगरानी व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से सभी डिवीजनों में प्रभावी बनाया जाएगा. विभाग का मानना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जंगलों की निगरानी अधिक सटीक होगी, अवैध कब्जों पर तेजी से कार्रवाई संभव होगी और भविष्य में वन भूमि पर नए अतिक्रमण की घटनाओं पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा.
