आरक्षण विधेयक राजभवन ने लौटाया

देहरादून: उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को राजकीय सेवाओं में 10 फीसदी क्षैतिज आरक्षण के विधेयक को राजभवन ने विधानसभा को लौटा दिया है। छह साल पहले इस विधेयक को विधानसभा से पारित कर राजभवन भेजा गया था लेकिन तब से विधेयक राजभवन में लम्बित था।

राजभवन के इस कदम से राज्य आंदोलनकारियों के आरक्षण पर एक बार फिर से उम्मीद बंधी है। माना जा रहा है कि सरकार आरक्षण विधेयक को दोबारा सदन से पास कराकर राजभवन को भेज सकती है। ऐसी स्थिति में राजभवन को विधेयक को मंजूरी देनी ही पड़ेगी।

राजभवन की ओर से अब विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को भेजा गया है। इससे अब राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण मिलने की उम्मीद जग गई है। हरीश रावत सरकार 2016 में राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए विधानसभा में विधेयक लाई थी।

विधानसभा से इस विधेयक को पारित कर राजभवन को भेजा गया था। लेकिन इस विधेयक को राजभवन से मंजूरी नहीं मिल पाई थी। विधेयक के राजभवन में ही अटक जाने से यह विधेयक कानून का रूप नहीं ले पाया। साथ ही सरकार के सामने दोबारा से विधेयक को विधानसभा में लाने का रास्ता भी बंद था। लेकिन, अब राजभवन से विधेयक लौटाए जाने से छह साल से बंद दरवाजा खुलने की उम्मीद बंध गई है।

सरकार के पास इस विधेयक को दुबारा विधानसभा से पारित कराने का विकल्प खुल गया है। हालांकि दुबारा इस विधेयक को राजभवन की मंजूरी के लिए भेजना होगा। राजभवन की मंजूरी के बाद ही राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण मिल पाएगा।

राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में दस प्रतिशत आरक्षण पर रोक के चलते, इस कोटे से चयनित कई युवाओं के नौकरी के लिफाफे चयन के बावजूद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में बंद हैं। सरकार ने दिसंबर 2018 में राज्य आंदोलनकारियों को मिले आरक्षण को हाईकोर्ट के आदेश के क्रम में समाप्त कर दिया।

इससे पहले आयोग सहायक लेखाकार, आबकारी और परिवहन विभाग में प्रवर्तन सिपाही, वैयक्तिक सहायक सहित कई विभागों के लिए भर्ती परीक्षाओं में युवाओं का इस कोटे के तहत चयन भी हुआ लेकिन इस बीच आरक्षण समाप्त होने से आयोग ने इन युवाओं का परिणाम जारी नहीं किया।

यदि राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण के विधेयक को मंजूरी मिलती है तो राज्य में बड़ी संख्या में लोगों को फायदा मिलेगा। इसके दायरे में राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान शहीद हुए 47 शहीदों के परिजनों के साथ ही 62 गोली खाने वाले घायलों व उनके परिजनों, आंदोलन के दौरान जेल गए लोगों, गंभीर रूप से घायल हुए लोगों और सक्रिय आंदोलनकारियों व उनके परिजनों को एक बार फिर लाभ मिल सकेगा।

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों को सरकारी सेवा में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण देने के विधेयक को विस्तार से समझने के बाद राज्यपाल ने इसे विधानसभा को पुनर्विचार के लिए लौटा दिया है। इस विधेयक पर कानूनी राय के बाद यह कदम उठाया गया है।

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