नगरासू गुरुद्वारे की छत से उतरे 2 निहंग

रुद्रप्रयाग: जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारा साहिब में 20 जून की शाम 7 निहंगों के घुसने के बाद से चला आ रहा घटनाक्रम अब सुलझने की ओर बढ़ रहा है. करीब 36 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज घटनाक्रम के बाद गुरुद्वारे की छत पर डटे 2 निहंग सिख सोमवार सुबह नीचे उतर आए. हालांकि अभी 5 निहंग गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर हैं. प्रशासन को उम्मीद है कि आज मामला पूरी तरह सुलझ जाएगा. इंटरनेट भी अब शुरू हो गया है. डीएम और एसपी ने इसे आपसी विवाद बताया है और अफवाहों से बचने की अपील की है.

नजो पांच निहंग अभी भी गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर मौजूद हैं, उनमें से एक खाना लेने नीचे आया. इस दौरान ऊपर मौजूद चार निहंगों ने अपने साथी को कवर देने के लिए पथराव कर दिया. किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए आज सुबह ही नगरासू गुरुद्वार के बाहर आईटीबीपी को भी तैनात किया गया है. गौरतलब है कि दो निहंग रुद्रप्रयाग प्रशासन से माफी मांगने के बाद अपने घर को जा चुके हैं. पांच निहंगों का अभी भी गुरुद्वारे की ऊपरी मंजिल पर कब्जा है.

रुद्रप्रयाग प्रशासन स्थिति को काबू में और शांत बता रहा है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि आखिर ऐसी स्थिति उत्पन्न कैसे हुई? यदि यह कोई अचानक लिया गया निर्णय था, तो मामला इतने लंबे समय तक क्यों चल रहा है? और यदि इसकी कोई पूर्व तैयारी थी, तो संबंधित एजेंसियों और स्थानीय सूचना तंत्र को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिल सकी? ये ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर भविष्य की सुरक्षा रणनीति तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं.

यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और श्री हेमकुंड साहिब यात्रा अपने चरम पर हैं. लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में उत्पन्न हुआ तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति समय रहते नियंत्रित नहीं होती है तो इसका असर प्रदेश के सामाजिक और धार्मिक सद्भावना पर भी पड़ सकता है.

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी रुद्रप्रयाग विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक निहारिका तोमर लगातार मौके पर डटे हुए हैं. दूसरे दिन सुबह से ही दोनों वरिष्ठ अधिकारी गुरुद्वारा परिसर में मौजूद रहे और पूरी स्थिति पर सीधी निगरानी बनाए रखी. जानकारी के अनुसार जिलाधिकारी और एसपी गुरुद्वारे की छत पर मौजूद निहंग सिखों से फोन और माइक के माध्यम से लगातार संवाद स्थापित कर रहे हैं.

अधिकारियों ने उन्हें संयम बरतने, कानून का सम्मान करने और शांतिपूर्ण समाधान स्वीकार करने के लिए समझाया. कई घंटों तक चली वार्ता के बाद आखिरकार थोड़ा बहुत सकारात्मक परिणाम सामने आया. फिलहाल 2 निहंग शांतिपूर्वक नीचे उतर गए. अभी 5 निहंग हालांकि गुरुद्वार की सबसे ऊपरी मंजिल पर डटे हुए हैं.

सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने वार्ता के दौरान स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन का उद्देश्य किसी भी पक्ष के साथ टकराव नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए सम्मानजनक समाधान निकालना है. इसी संवाद और विश्वास की रणनीति से पूरे घटनाक्रम को शांतिपूर्ण अंत तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है. प्रशासन ने संवाद के साथ प्रतीक्षा करो और देखो (Wait and Watch) की रणनीति अपनाई.

घटना ने एक बार फिर संवेदनशील धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और खुफिया निगरानी की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है. यदि किसी प्रकार की गतिविधियां पहले से चल रही थीं, तो उनकी जानकारी संबंधित एजेंसियों तक क्यों नहीं पहुंची? क्या स्थानीय स्तर पर निगरानी में कोई कमी रही या फिर सूचना संकलन और विश्लेषण की प्रक्रिया में कहीं चूक हुई?

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि यदि प्रशासन जल्दबाजी या कठोर कार्रवाई करता, तो स्थिति और अधिक जटिल हो सकती थी. लेकिन जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और एसपी निहारिका तोमर के नेतृत्व में अपनाई गई संतुलित रणनीति ने संभावित संकट को फिलहाल टाल दिया.

उत्तराखंड सदियों से धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सौहार्द की भूमि रहा है. यहां विभिन्न समुदायों के लोग परस्पर सम्मान और विश्वास के साथ रहते आए हैं. ऐसे में नगरासू जैसी घटनाएं केवल किसी एक धार्मिक स्थल या समुदाय का विषय नहीं होतीं, बल्कि पूरे प्रदेश की सामाजिक एकता और शांति व्यवस्था से जुड़ा मामला बन जाती हैं.

रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू गुरुद्वारे में हुए विवाद से पैदा हुए तनाव के बाद, जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इंटरनेट सर्विस रोक दी थी, जो करीब 12 घंटे बाद फिर से चालू हो गई है. इससे पहले, कानून-व्यवस्था में गड़बड़ी की आशंका के चलते प्रशासनिक आदेशों और गृह विभाग की सिफारिशों पर राज्य के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सर्विस कुछ समय के लिए रोक दी गई थीं. हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा के बाद फरवरी 2024 में भी बड़े पैमाने पर इंटरनेट बंद किया गया था. क्योंकि सोशल मीडिया पर कई लोग अफवाहें फैलाने लगे थे, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो रहा था.

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