नई दिल्लीः न्यूयॉर्क के इथाका शहर में मौजूद ‘ईस्ट लॉन कब्रिस्तान’ के नीचे वैज्ञानिकों को 5.5 मिलियन ‘माइनिंग मधुमक्खियां’ मिली हैं। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी की लैब टेक्नीशियन रेचेल फोर्डिस जब पार्किंग के पैसे बचाने के लिए कब्रिस्तान से पैदल जा रही थीं, तब उनकी नजर पैरों के पास भिनभिनाती इन मधुमक्खियों पर पड़ी और उन्होंने लैब में इसकी पहचान की।
वैज्ञानिकों ने जब इस जगह पर रिसर्च शुरू की, तो पता चला कि ‘एंड्रेना रेगुलरिस’ प्रजाति की ये मधुमक्खियां 1900 के दशक की शुरुआत से ही इस कब्रिस्तान में रह रही हैं। यानी लगभग 100 सालों से इनका साम्राज्य जमीन के नीचे बिना किसी रुकावट के चल रहा था। ‘एपिडोलॉजी’ जर्नल में छपी स्टडी के मुख्य लेखक स्टीवन टी. होगे ने बताया कि वसंत के मौसम में 6 हफ्ते के अंदर वहां से ट्रैप लगाकर 3,251 कीड़े कलेक्ट किए गए, जिससे 1.5 एकड़ इलाके में 55 लाख मधुमक्खियों के होने का अनुमान लगाया गया है।
ये माइनिंग मधुमक्खियां आमतौर पर अकेले रहना पसंद करती हैं, लेकिन यहां की मिट्टी अच्छी होने की वजह से इन्होंने जमीन के अंदर अपनी विशाल कॉलोनी बना ली है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि कब्रिस्तान से सिर्फ 500 मीटर की दूरी पर कॉर्नेल ऑर्चर्ड्स (सेब के बागान) मौजूद हैं। ये लाखों मधुमक्खियां हर साल वसंत ऋतु में ठीक उसी समय जमीन से बाहर आती हैं जब सेब के पेड़ों पर फूल खिलते हैं। इससे पेड़ों को ‘पॉलिनेटर्स’ (परागण) में भारी मदद मिलती है, और मधुमक्खियों को अपना भरपूर भोजन मिल जाता है।
यह स्टोरी इंटरनेट पर लोगों का खूब ध्यान खींच रही है। क्योंकि इस खोज ने सबको हैरान कर दिया है कि कैसे प्रकृति, इंसान की नजरों से बचकर दशकों तक अपना काम कर सकती है। आज जब दुनिया भर में पोलिनेटर्स और मधुमक्खियों की आबादी कम होने का खतरा मंडरा रहा है, तब 55 लाख मधुमक्खियों की एक सुरक्षित आबादी का मिलना पर्यावरण के लिए बहुत अच्छी खबर है।इसके अलावा, लोगों को यह बात भी काफी दिलचस्प लग रही है कि पार्किंग के पैसे बचाने जैसी छोटी सी कोशिश ने वैज्ञानिकों को इतिहास की सबसे बड़ी मधुमक्खी कॉलोनियों में से एक को खोजने में मदद की!
