नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान शांतिवार्ता के लिए इस्लामाबाद में बैठक कर रहे हैं, लेकिन इसी बीच अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान द्वारा बिछाई गई माइंस को पता लगाने और उन्हें हटाने में असमर्थ होने के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित मार्ग में देरी हो रही है, जबकि सामान्य जहाजी आवाजाही बहाल करने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से फिर से खोलने में ईरान की असमर्थता की जड़ में एक बुनियादी समस्या है। ईरान मिडिल-ईस्ट संघर्ष के दौरान बिछाई गई सभी माइंस का पता नहीं लगा पा रहा है और न ही उसके पास उन्हें हटाने की तकनीकी क्षमता है।
इस समस्या की शुरुआत पिछले महीने हुई थी, जब अमेरिका और इजरायल द्वारा इस इस्लामी राष्ट्र के खिलाफ युद्ध छेड़ने के तुरंत बाद, ईरान ने छोटी नावों का इस्तेमाल करके इस जलमार्ग में माइंस बिछाना शुरू कर दिया था। माइंस बिछाए जाने से पहले ही, व्यवधान शुरू हो चुका था।सरकारी मीडिया के अनुसार, 2 मार्च को IRGC के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जलडमरूमध्य को बंद घोषित कर दिया और चेतावनी दी कि इसमें प्रवेश करने वाले किसी भी जहाज में आग लगाई जा सकती है। इससे जहाजी आवाजाही में हड़कंप मच गया और दुनिया भर में तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।
जब माइंस बिछा दी गईं तो इसका प्रभाव और भी व्यापक हो गया। टैंकरों की आवाजाही में भारी गिरावट आई और ईरानी ड्रोन तथा मिसाइल हमलों के जोखिम और बढ़ गया।ईरान ने एक संकरा जलमार्ग खुला रखा था, जिससे उन जहाजों को गुजरने की अनुमति मिल रही थी, जो टोल देने को तैयार थे। IRGC ने जहाजों को माइंस से टकराने के खतरे के प्रति आगाह किया है, जबकि, अर्ध सरकारी मीडिया ने सुरक्षित मार्गों को दर्शाने वाले नक्शे प्रकाशित किए हैं, हालांकि ये मार्ग अभी भी सीमित हैं।
जलमार्ग को तेजी से साफ करने में असमर्थता के कारण सामान्य जहाजी आवाजाही बहाल करने की ट्रंप प्रशासन की मांगों पर ईरान की प्रतिक्रिया धीमी पड़ गई है। यह मुद्दा आज इस्लामाबाद में शांति वार्ता के लिए अराघची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से मुलाकात के दौरान प्रमुखता से उठाया जाएगा।
बारूदी माइंस को हटाना उन्हें बिछाने से कही अधिक जटिल साबित हो रहा है। यहां तक कि अमेरिका सेना, अपने हाई टेक सिस्टम के बावजूद, बारूदी माइंस को हटाने के लिए विशेष तटीय युद्धपोतों पर निर्भर है और उसके पास व्यापक क्षमताएं नहीं हैं। अधिकारियों ने कहा कि ईरान के पास ऐसी कार्रवाई को तेजी से अंजाम देने के साधन नहीं हैं। यहां तक कि उन बारूदी माइंस के लिए जिन्हें उसने खुद बिछाया है।
