नई दिल्ली: भारत में इस साल भीषण गर्मी का दौर जारी है। देश के कई हिस्सों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से उपर चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब समस्या केवल बढ़ते तापमान तक सीमित नहीं रह गई है। बढ़ती उमस, गर्म होती रातें, शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव ने हीटवेव को पहले के मुकाबले कहीं अधिक खतरनाक और असहनीय बना दिया है।
दुनिया भर के गर्म शहरों की लिस्ट जारी करने वाली वेबसाइट्स के अनुसार शाम छह बजे दुनिया के सबसे गर्म 100 शहरों में 94 अकेले भारत के रहे। दिल्ली में शुक्रवार को लू के हालात नहीं रहे, लेकिन आज से फिर 25 मई तक लू का अलर्ट है। सबसे गर्म शहर विदर्भ का ब्रहापुरी रहा। यहां का तापमान 47.2 रहा।वर्धा में तापमान 47.0 डिग्री, एमपी के नौगांव में 46.5 डिग्री और बांदा व खुजराहों में 46.4 डिग्री रहा। पूर्वानुमान के अनुसार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 28 मई तक गंभीर लू की स्थिति रहेगी। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, राजस्थान, विदर्भ, तटीय आंध्र प्रदेश और यमन में 27 मई तक, बिहार में 24 मई तक लू के आसार है।
देश के 10 सबसे गर्म शहर
बांदा (उत्तर प्रदेश)- (तापमान- 47°C-49°C)
फलोदी (राजस्थान)- (तापमान- 46°C-47°C)
मुंगेशपुर और नरेला (दिल्ली)- (तापमान- 45°C-46°C)
सिरसा (हरियाणा)- (तापमान- 44-45)
नागपुर (महाराष्ट्र)- (तापमान-43°C-44°C)
झांसी (उत्तर प्रदेश)- (तापमान- 42°C-43°C)
खजुराहो (मध्य प्रदेश)- (तापमान- 41°C-42°C)
रोहतक (हरियाणा)-(तापमान- 41°C-42°C)
डाल्टनगंज (मेदिनीनगर, झारखंड) -(तापमान- 42°C-43°C)
बिलासपुर (छत्तीसगढ़)- (तापमान- 41°C-42°C)
2010 से 2024 के बीच भारत का औसत न्यूनतम तापमान प्रति दशक करीब 0.21 डिग्री बढ़ा1961 से 2020 के बीच इस क्षेत्र में हीटवेव प्रति दशक बढ़ी हैजबकि हीटवेव की कुल अवधि में प्रति दशक 0.44 दिन का इजाफा हुआ है2015-19 के दौरान भारत की औसत नमी 67.1% थी। यह 2020-24 में बढ़कर 71.2% हो गई। दिल्ली में इस अवधि के दौरान नमी में 8% का इजाफा हुआ। हरियाणा, चंडीगढ़, तेलगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
गर्मी और उमस के संयुक्त प्रभाव को दर्शाने वाले ‘कपाउड हॉट-हामिड डे’ की सख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2020 से 2024 के दौरान बढ़कर 16,970 हो गई। उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, गुजरात, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आध्र प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में यह सबसे अधिक बढे है।कक्रीट, डामर और ऊंची इमारतों से भरे शहर दिनभर गर्मी सोखते है और रात में धीरे-धीरे उसे छोड़ते है। इस कारण शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 2 से 10 डिग्री तक अधिक गर्म हो सकते है। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में यह प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है।
क्लाइमेट ट्रेड्स की फाउडर और डायरेक्टर आरती खोसला का कहना है कि बढ़ती गर्मी, गर्म रातें, अधिक आर्द्रता और तेज शहरीकरण मिलकर हीट स्ट्रेस को बढ़ा रहे है। DMD के डीजी मृत्युंजय महापात्रा ने कहा कि हीटवेव से बचाव के लिए पूर्वानुमान का सबसे सर्वेदनशील वर्गों तक पहुंचना अहम है। रिक्शा चालक, रेहड़ी-पटरी विक्रेता और घरेलू कामगार जैसे लोगों तक मौसम सबधी जानकारी पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे है।

