जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारों से गुंजायमान हुई घाटी
चमोली। सिखों के पवित्र स्थल श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को विधि विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के अवसर पर पूरी घाटी जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के जयकारों से गुंजायमान रही। घांघरिया से पंज प्यारों की अगुवाई में श्रद्धालुओं का जत्था हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हुआ। पंजाब से आए बैंड की मधुर ध्वनि के साथ सुबह करीब नौ बजे गुरुग्रंथ साहिब को सचखंड साहिब से दरबार साहिब में सुशोभित किया गया। इसके बाद सुखमनी का पाठ किया गया।
रागी भाई सुखदीप सिंह ने कीर्तन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात दोपहर करीब 12 बजे गुरुद्वारे के ग्रंथी सरदार हमीर सिंह ने इस साल की पहली अरदास पढ़ी और एक बजे हुकुमनामा लिया गया। इसके साथ ही यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया। 15 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब में पहुंचे सिख श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में डुबकी लगाकर स्नान किया और फिर गुरुद्वारे में मत्था टेका।
दोपहर तक श्रद्धालु हेमकुंड साहिब में पहुंचते रहे। गुरुद्वारा ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने आस्था पथ से बर्फ हटाकर मार्ग को सुचारु बनाने के लिए भारतीय सेना की ओर से की गई सेवा के लिए उनका आभार व्यक्त किया।गुरुद्वारा के वरिष्ठ प्रबंधक सेवा सिंह ने देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को गुरु गोविंद सिंह के पावन धाम से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि पहले दिन करीब 6500 श्रद्धालुओं ने हिम सरोवर में स्नान करने के बाद गुरुद्वारे में मत्था टेका।
गुरुद्वारा प्रबंधन की ओर से भारतीय सेना के ब्रिगेडियर गौरव बत्रा व कर्नल वीरेंद्र को सेना द्वारा आस्था पथ पर किए गए उत्कृष्ट कार्य के लिए सिरोपा प्रदान किया। साथ ही भीड़ प्रबंधन में बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए कोतवाली गोविंदघाट प्रभारी चित्रगुप्त और एसआई अमनदीप को भी सिरोपा से सम्मानित किया।
गुरुद्वारा ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने हेमकुंड पहुंचे संगत से गुरुद्वारा परिसर में फोटो खींचने व वीडियो बनाने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान है, यहां की गरिमा व पवित्रता बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
हेमकुंड साहिब के आस्था पथ पर अभी भी बर्फ जमी हुई है। वहीं हेमकुंड गुरुद्वारा परिसर के आसपास भी काफी मात्रा में बर्फ है। श्रद्धालुओं के लिए मई के महीने में बर्फ के बीच से गुजरने का रोमांच ही कुछ अलग रहा। मैदानी क्षेत्रों में जहां लोग हीट वेव से जूझ रहे हैं वहीं हेमकुंड साहिब के मार्ग पर बर्फ के बीच से श्रद्धालु गुजर रहे हैं।

