हैदराबाद : अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध के दौरान ईरान ने दावा किया कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास अमेरिका के ताकतवर MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने के लिए एक नया एयर डिफेंस सिस्टम इस्तेमाल किया था. एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब 30 से 34 मिलियन डॉलर है.इससे पता चलता है कि ईरान ने अपने सैन्य ठिकानों पर महीने भर चले अमेरिका और इजरायल के हमलों के बावजूद नए खतरों को रोकने की अपनी क्षमता बरकरार रखी है. ईरानी मीडिया ने बताया कि अमेरिकी ड्रोन को होर्मुज जलडमरूमध्य में केश्म द्वीप के पास मार गिराया गया. उन्होंने यह भी बताया कि यह पहली बार था जब ‘आराश-ए-कमंगीर’ नाम के स्थानीय रूप से विकसित एयर डिफेंस सिस्टम का युद्ध में इस्तेमाल किया गया.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के इस दावे को लेकर कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि उसने एक नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है. बताया जा रहा है कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की सैन्य शक्ति की जासूसी करने के लिए अपने एमक्यू-9 ड्रोन को भेजा था. हालांकि, यह ड्रोन ईरान के एयर डिफेंस यूनिट की नजर में आने के साथ ही उसको मार गिराया गया. वहीं इस हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि उसने जवाबी कार्रवाई में बहरीन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला किया था.
तेहरान की एयर-डिफेंस बनावट को बड़े पैमाने पर सख्त, कमजोर और मैप करने में आसान माना जाता था. इसे 2016 में रूस ने प्रदान किया था. वहीं ईरान रूस में बनी S-300 पीएम-2 बैटरी जैसे सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम पर बहुत ज़्यादा निर्भर था. इसके साथ ही बावर-373 और खोरदाद-15 जैसे देसी प्लेटफॉर्म पर भी उसकी निर्भरता थी. 16 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले देश के लिए, सिर्फ चार S-300 की तैनाती से उसके इलाके में निगरानी में बहुत बड़ी कमी रह गई.
इसकी सबसे बड़ी संरचनात्मक कमजोरी एक्टिव हाई-फ़्रीक्वेंसी रडार एमिशन पर इसकी निर्भरता थी, जिसे पश्चिमी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां आसानी से पता कर सकते थे और टारगेट कर सकते थे.इज़राइली और अमेरिकी एयर फोर्स ने ग्रीस के चलाए जा रहे ऐसे ही सिस्टम के साथ सामरिक बनावट के जरिए S-300 की कमज़ोरियों की स्टडी करने में कई साल बिताए थे. नतीजतन, 2026 में गठबंधन के दमन अभियानों ने कथित तौर पर मुख्य टारगेटिंग रडार को काफी आसानी से बेअसर कर दिया, जिससे ईरान की कुछ सबसे एडवांस्ड मिसाइल बैटरियां असल में काम नहीं कर सकीं.
ईरान की समाचार एजेंसी फार्स ने कुछ अनाम ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा, “यह ऑपरेशन, जिसे छिपी हुई क्षमताओं वाले एक सिस्टम का इस्तेमाल करके अंजाम दिया गया, ईरान की ओर से एक साफ और निर्णायक संदेश है.” फार्स की रिपोर्ट में बताए गए इस नए इंटरसेप्टर सिस्टम का फारसी में मतलब है “आराश तीरंदाज”. इसका नाम फारसी पौराणिक कथाओं के एक नायक के नाम पर रखा गया है. लोककथाओं के अनुसार, इस नायक ने एक तीर चलाकर ईरान और मध्य एशिया के बीच की सीमा तय की थी. व्यापक अर्थों में, आराश को कविताओं और अन्य साहित्य में एक ऐसे नायक के रूप में पूजा जाता है, जिसने ईरान को विदेशी प्रभुत्व से लड़ने में मदद की थी.
ईरान के नए एयर डिफेंस का नाम ‘अराश-ए-कामंगीर’ (Arash-e-Kamangir) है. ईरानी पौराणिक कथाओं के महान वीर योद्धा अराश के नाम पर बनाए गए इस हथियार को पहली बार तेहरान ने इस्तेमाल किया है. जिनके बारे में लोककथाओं में कहा जाता है कि उन्होंने ईरान और मध्य एशिया के बीच सीमा खींचने के लिए एक तीर चलाया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सिस्टम ‘स्टील्थ-डिटेक्शन’ की क्षमता रखा है. ईरान की ओर से इसके बारे में ज्यादा तकनीकी जानकारी नहीं दी गई.
हालांकि तेहरान ने कम लागत वाले, मोबाइल और देश में बने एयर डिफेंस सिस्टम में तेजी से निवेश किया है. ये सिस्टम ड्रोन और एयरक्राफ्ट को टारगेट करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, और इसके लिए बड़े निश्चित रडार स्थापना पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, जिसकी वजह से इन्हें नष्ट करना आसान होता है.
सेना विशेषज्ञ ने कहा कि रिपोर्ट किया गया इंटरसेप्शन ईरान की एक बड़ी रणनीति को दिखाता है, जो टेक्नोलॉजी में बेहतरी के बजाय सामर्थ्य, लचीलापन और अनुकूलनशीलता पर फोकस करती है.यह समझते हुए कि वह पारंपरिक मुकाबले में पश्चिमी एयर पावर का मुकाबला नहीं कर सकता, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने छोटी, बहुत ज़्यादा मोबाइल, कम लागत वाली और ज़्यादातर निष्क्रिय इकाईयों के आस-पास बने रक्षा मॉडल की ओर रुख किया.
इस तरीके का असर 2026 में और ज़्यादा दिखने लगा. इसका सबसे खास पल अप्रैल में आया, जब लगभग 7,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहे एक F-15E स्ट्राइक ईगल को कथित तौर पर एक मानव पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम (MANPADS) ने गिरा दिया, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह या तो चीनी FN-6 वेरिएंट था या उसका ईरानी साधित, मिसाघ-3.
ईरानी अधिकारियों के हवाले से बताया कि हो सकता है कि ‘अराश-ए-कमंगीर’ बिल्कुल नया और क्रांतिकारी हथियार न हो, बल्कि यह ईरान के उस बड़े बदलाव का ही एक और कदम हो, जिसके तहत वह आसानी से कहीं भी ले जाए जा सकने वाले और कम लागत वाले हवाई रक्षा प्रणालियों की ओर बढ़ रहा है.
