पीओके में विरोध जारी, अब तक 26 की मौत

नई दिल्ली : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना का दमन जारी है. अब तक 26 लोगों के मारे जाने की खबर है. जिनको निशाना बनाया गया है, उनमें बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं. इस बीच पाक सेना का एक हेलीकॉप्टर भी गिर गया है.

पाक सेना के दमन के खिलाफ पीओके के अलग-अलग हिस्सों में ‘ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) के विरोध प्रदर्शन के आह्वान के बाद दुकानें और बाजार बंद रहे. पीओके में पाकिस्तानी सेना का MI-17 हेलीकॉप्टर गिर गया. इस पर सवार सभी सैन्यकर्मी मारे गए. सेना ने तुरंत यह नहीं बताया कि हेलीकॉप्टर में कितने लोग सवार थे. क्या इसे वहां पर विरोध करने वालों ने मार गिराया, या फिर किसी और कारण से यह क्रैश हुआ, इसके बारे में जानकारी नहींं दी गई है. घटना मुजफ़्फराबाद के पास हुई. यह पीओके की राजधानी है. इसके पास ही विरोधियों का प्रदर्शन चल रहा है.

मीडिया में एक और रिपोर्ट की चर्चा है. पीओके में बढ़ती अशांति के बीच एक खुफिया डोजियर ने 5 जून से 9 जून के बीच पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा व्यवस्थित हिंसा की खबरें दी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा बारमंग ब्रिज शूटिंग से शुरू हुई थी. डोजियर का दावा है कि पाकिस्तानी सेना ने आर्थिक सुधारों के लिए अभियान चलाने वाले समूह संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को निशाना बनाया और आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत इस पर प्रतिबंध लगा दिया.इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि जेएएसी नेता शहजैब हबीब की हत्या के बाद तनाव बढ़ गया है, जबकि मरने वालों की संख्या बढ़ रही है. डोजियर का दावा है कि इस अवधि के दौरान मारे गए लोगों में 19 बच्चे और सात गर्भवती महिलाएं शामिल थीं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, जेएएसी से जुड़े करीब 2,000 प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को भीमबर से विरोध मार्च शुरू किया और वे मुजफ़्फराबाद जाने के लिए मीरपुर पहुंचे. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ प्रदर्शनकारी रावलकोट पहुंचना चाहते थे और फिर मुजफ़्फराबाद के लिए आगे बढ़ने की योजना थी. पाकिस्तानी सेना ने इसे रोकने की पूरी कोशिश की. पुलिस और सुरक्षा बल सड़कों और दूसरे इलाकों में गश्त कर रहे हैं.जेएएसी सब्सिडी वाले आटे और बिजली की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है. अधिकारियों ने गत शुक्रवार को कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर चिंताओं का हवाला देते हुए इस समूह को गैर-कानूनी घोषित कर दिया था.

‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, मुजफ़्फराबाद की सड़कें सुनसान थीं और सड़कों पर शायद ही कोई गाड़ी दिख रही थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि शहर में दंगा-रोधी पुलिस और अर्धसैनिक बल के जवान तैनात थे. हालांकि, शहर में कोई विरोध प्रदर्शन नहीं देखा गया. रिपोर्ट के अनुसार, पीओके के एक और बड़े शहर मीरपुर के कायद-ए-आजम स्टेडियम में सैकड़ों लोग जमा हुए थे. स्थानीय पत्रकार सज्जाद जर्राल ने टेलीफोन पर ‘डॉन’ को बताया, “यहां दुकानें बंद हैं और सड़कों पर ट्रैफिक नहीं है.”

जेएएसी के मुख्य सदस्य और सीनियर वकील अमजद अली खान की कथित गिरफ्तारी के विरोध में बार काउंसिल के बुलावे पर पीओके के वकीलों ने अदालती कार्यवाही का बहिष्कार किया. पाकिस्तान की मानवाधिकार संस्था ने सोमवार को कहा कि पीओके में हिंसक झड़पों के दौरान जारी हिंसा से वह “बहुत चिंतित” है.

बौखलाए पाकिस्तानी अधिकारियों ने मंगलवार को उन लोगों के लिए इनाम की घोषणा की, जो जेएएसी के मुख्य नेताओं की गिरफ्तारी में मदद करेंगे. एक आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, जो कोई भी व्यक्ति जेएएसी के मुख्य नेताओं – जिनमें शौकत नवाज मीर, उमर नजीर कश्मीरी, सरदार अमन और ख्वाजा मेहरान शामिल हैं – की सफल गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देगा, उसे “एक करोड़ रुपये का इनाम” दिया जाएगा.

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि वांछित लोगों की गिरफ्तारी में मदद करने वाली जानकारी देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी. इस बीच, पीओके के तथाकथित प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने पिछले कुछ दिनों से इलाके में फैले तनाव को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर लौटने का आग्रह किया.

राठौर ने यह भी माना कि हालांकि प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगों, खासकर शरणार्थी सीटों से जुड़ी मांगों पर सावधानीपूर्वक समीक्षा की जरूरत है, लेकिन समाधान टकराव के बजाय बातचीत से ही निकलना चाहिए. जेएएसी लंबे समय से पीओके की तथाकथित विधानसभा में 12 “शरणार्थी सीटों” को खत्म करने की मांग कर रहा है. ये सीटें कश्मीर के उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो 1947 के बाद पाकिस्तान में बस गए थे.

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