घाटे में चल रहा ऊर्जा निगम

कर्मचारियों के लिए बिना टेंडर खरीदे जा रहे मोबाइल-लैपटॉप

देहरादून: घाटे में चल रहे ऊर्जा निगम की ओर से अफसरों और कर्मचारियों के मोबाइल, लैपटॉप खर्च पर सवाल उठ रहे हैं। क्योंकि, घाटे के कारण ऊर्जा निगम हर साल नियामक आयोग में बिजली के दाम बढ़ाने की सिफारिश करता है। यही नहीं, बिजली के दाम बढ़ाने के बाद सरचार्ज को भी बढ़ाने के प्रस्ताव के पीछे घाटे का हवाला देता है। दूसरी ओर, अफसर-कर्मचारियों के लिए मोबाइल और लैपटॉप की खरीद की रही है।

आरटीआई में दी गई सूचना में यूपीसीएल ने स्वीकार किया है कि वह अपने कर्मचारियों को आहरण और वितरण इकाई द्वारा स्वयं पोषित एवं प्रतिपूर्ति योजना के तहत लैपटॉप और मोबाइल मुहैया करवा रहा है। एक मोबाइल की कीमत 15 से 29 हजार और लैपटॉप की कीमत 53 से 79 हजार रुपये है। इन उपकरणों की मरम्मत के लिए तीन साल की अवधि तक 33 फीसदी तक मेंटेनेंस चार्ज भी दिया जा रहा है।

ऊर्जा निगम हर साल अरबों रुपये का घाटे में रहता है। इसके अलावा 25 करोड़ रुपये प्रतिमाह वेतन पर खर्च होता है, पेंशनर्स को पेंशन का भुगतान ट्रेजरी से होता है। बैंकों का ओवर ड्रॉ करीब 500 करोड़ रुपये तक रहता है। ऊर्जा निगम को करीब एक हजार करोड़ रुपये का नुकसान अकेले लाइनलॉस से ही होता है। बिजली की खरीद पर भी यूपीसीएल करोड़ों रुपये खर्च करता है।

सामाजिक कार्यकर्ता वीरू बिष्ट के मुताबिक, बीते वित्तीय वर्ष में ऊर्जा निगम ने घाटे की वजह से बिजली के दाम बढ़ाने का प्रस्ताव आयोग में दिया था। योजना पर सवाल इसलिए भी है कि चूंकि यूपीसीएल ग्रीन चार्ज, फ्यूल चार्ज, सरचार्ज, बिजली दर के नाम पर हर साल रेट बढ़ाने की सिफारिश करता है, जिससे उपभोक्ताओं पर दबाव बढ़ रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया है कि आखिर जब निगम घाटे में है तो फिर मोबाइल और लैपटॉप खरीद पर रोक क्यों नहीं लगाई। यदि कर्मचारियों को लैपटॉप, मोबाइल देने इतने ही जरूरी थे तो इनकी खरीद के लिए टेंडर क्यों नहीं निकाले गए?

यूपीसीएल के निदेशक ऑपरेशन,एमएल प्रसाद ने कहा- यूपीसीएल में जो नए अधिकारी-कर्मचारी आए हैं, यह योजना उनके लिए लागू की गई है। उनमें ईई, एई, जेई से लेकर लेखाकार, टीजी वन और टीजी टू स्तर तक के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हैं। ऊर्जा निगम में कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए यह योजना लाई गई है।

आरटीआई के तहत में मिली जानकारी के अनुसार, ऊर्जा निगम के नैनीताल डिवीजन ने इस साल मोबाइल खरीद पर कुल 2.72 लाख रुपये खर्च किए। जबकि लैपटॉप खरीद पर 4.24 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

विद्युत वितरण खंड पिथौरागढ़ में पांच कर्मचारियों को मोबाइल फोन दिए गए हैं, जिस पर 85 हजार रुपये खर्च हुए। देहरादून में वर्कशॉप डिवीजन में पांच लैपटॉप पर 2.65 लाख रुपये खर्च किए गए, जिन्हें लैपटॉप और मोबाइल दिए जा रहे हैं।

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