ब्यूनस आयर्स: साउथ अमेरिका में डायनासोर का एक फॉसिल वाला अंडा मिला है। इस खोज ने डायनासोर की जिंदगी के बारे में समझ बेहतर होने की वैज्ञानिकों की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। साइंटिस्ट इसे एक बड़ी खोज बता रहे हैं। यह अंडा करीब 70 मिलियन साल (7 करोड़) पुराना माना जा रहा है लेकिन इसे बहुत अच्छी तरह संभालकर रखा गया है और इसमें बच्चा हो सकता है। इस अंडे पर रिसर्च से पता चल सकता है कि डायनासोर कैसे पले-बढ़े थे।
यह अहम खोज अर्जेंटीना के नेचुरल साइंसेज म्यूजियम में वर्टीब्रेट के कम्पेरेटिव एनाटॉमी और इवोल्यूशन की लेबोरेटरी ने की है। पैलियोन्टोलॉजिस्ट फेडेरिको एग्नोलिन और उनके साथी मैटियास मोट्टा का मानना है कि यह साउथ अमेरिका में मिला मांसाहारी डायनासोर का पहला पूरा अंडा है। इससे लेट क्रेटेशियस पीरियड के दौरान घोंसले बनाने के तरीके, एम्ब्रियो के विकास और प्रजनन की दुर्लभ जानकारी मिल सकती है।
डिस्कवर मैगजीन ने बताया है कि मांसाहारी डायनासोर के फॉसिल अंडे बहुत कम मिलते हैं। यही बात इसे खासतौर पर दिलचस्प बनाती है। यह अंडा आज के पतक्षियों के जैसा अंडाकार ना कि लंबी गर्दन वाले सॉरोपोड के गोल मोटे शेल जैसा है। इसका आकार और शेल पर अजीब निशान बताते हैं कि यह किसी ऐसी प्रजाति का हो सकता है जिसे हमने पहले नहीं देखा है।
रिसर्च टीम को शुरू में लगा कि यह बोनापार्टेनिकस हो सकता है, जो एक छोटा लोकल थेरोपोड है लेकिन अब ऐसा होना मुश्किल लगता है। एग्नोलिन और उनके साथ काम करने वालों का मानना है कि यह एक अलग तरह का मांसाहारी डायनासोर हो सकता है। वे साल खत्म होने से पहले अंडे को माइक्रो-CT से स्कैन करने का प्लान बना रहे हैं।
अंडे के स्कैन से पता चल सकता है कि अंदर कोई एम्ब्रियोनिक स्केलेटन है या नहीं। भले ही एम्ब्रियो पूरा न हो फिर भी यह उसके पोस्चर, ग्रोथ या उसके सांस लेने के सिस्टम के काम करने के तरीके का पता लगा सकता है। डायनासोर एम्ब्रियो दुनिया में कहीं भी बहुत कम मिलते हैं। अर्जेंटीना में भी पहले सिर्फ सॉरोपॉड एम्ब्रियो मिले हैं।
इस एम्ब्रियो के अंदर अगर मांसाहारी एम्ब्रियो है तो इन शिकारियों के बारे में और जानने का यह एक बड़ा मौका होगा, जब वे अभी भी डेवलप हो रहे होंगे। डायनासोर के घोंसले बनाने के सबूत दिखाते हैं कि वे बच्चों को कैसे पालते थे। अंडे के पास से रोकासॉरस मुनियोजी के फॉसिल भी मिले हैं। इससे मांसाहारी डायनासोर के रिप्रोडक्टिव व्यवहार पर रोशनी पड़ सकती है।
अभी तक साउथ अमेरिका में मांसाहारी डायनासोर के किसी घोंसले का पता नहीं चला है। इस खोज से साइंटिस्ट को यह समझने में मदद मिल सकती है कि घोंसले बनाने का बिहेवियर कैसे डेवलप हुआ। इससे सिर्फ अंडे देने वाले रेप्टाइल्स और घोंसले बनाने, अंडे सेने और अपने चूजों की देखभाल करने वाले आज के पक्षियों के बीच का गैप कम हो जाएगा।
एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ कंकाल से जीव के व्यवहार की जानकारी कम मिलती है लेकिन घोंसले बहुत कुछ बता सकते हैं। वे बता सकते हैं कि ये डायनासोर सोशल, अकेले रहने वाले या कैसे माता-पिता थे। यह खोज उस विकास के रास्ते का पता लगाने में मदद करती है, जिससे उनकी पक्षियों जैसी पेरेंटिंग हुई। एग्नोलिन कहते हैं कि यह खोज रियल टाइम में साइंटिफिक प्रोसेस को दिखाने की है।
