बीरभूम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन दिन पहले बंगाल के कूचबिहार में चुनावी सभा से जहां ममता सरकार पर ताबड़तोड़ जुबानी हमले किए और राज्य सरकार को सवालों के घेरे में रखा। वहीं आज फिर राज्य के बीरभूम में जनसभा से उन्होंने प्रदेश की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जोरदार निशाना साधा। उन्होंने जनसभा को संबोधित करते हुए बीरभूम की धरती को ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और प्रेरणा से भरी बताया।
उन्होंने कहा, गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ऐसा समाज देखना चाहते थे, जहां हर कोई भय से मुक्त हो। टीएमसी के महाजंगलराज ने इसके बिल्कुल उल्टा कर दिया। ये मां, माटी और मानुष की बात करते थे, लेकिन मां आज रो रही है। माटी पर घुसपैठियों का कब्जा हो रहा है और मानुष भयभीत, डरा-सहमा हुआ है। टीएमसी के महाजंगलराज का साक्षी बीरभूम है। बोगतुई में जो कुछ हुआ था, वह केवल एक घटना नहीं, बल्कि मानवता के माथे पर कलंक था। निर्दोष महिलाओं और बच्चों को जिंदा जला दिया गया। यह महाजंगलराज नहीं तो क्या है? यह घटना टीएमसी सिंडिकेट के गुंडाराज का बहुत खतरनाक सबूत है।
माटी आपकी, हक आपका, लेकिन इस पर कब्जे के लिए गैंगवार चल रही है। बालू, पत्थर और कोयला की जो लूट चल रही है, यह टीएमसी के बड़े-बड़े नेताओं और उनके आलाकमान के आशीर्वाद से हो रहा है। बंगाल की माटी पर घुसपैठियों का कब्जा बहुत ही खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री ने घुसपैठ का जिक्र करते हुए कहा, टीएमसी का सिंडिकेट घुसपैठियों को फर्जी सरकारी डॉक्यूमेंट दिलवा रहा है। पड़ोस से घुसपैठिए अंदर आते हैं। पंचायत और अन्य सरकारी दफ्तर में डरा-धमकाकर गलत काम कराए जा रहे हैं।
फर्जी डॉक्यूमेंट बनाने का काला खेल बंगाल की और देश की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। बंगाल में भाजपा सरकार बनते ही घुसपैठियों के मददगार लोगों के खिलाफ एक विशेष जांच बैठाई जाएगी। यह मेरी गारंटी है। घुसपैठियों के हर मददगार को, चाहे वह कितना भी ताकतवर क्यों न हो, उनकी पहचान की जाएगी। घुसपैठियों को भी खदेड़ा जाएगा और उनके जो आका हैं, उन्हें जेल में भरा जाएगा। सरकारी योजना हो, मजदूरी का काम हो, घुसपैठिए कम पैसे में यह काम यहां के लोगों से छीन लेते हैं। यहां के लोकल लोगों को काम की तलाशी में कहीं और पलायन करना पड़ता है। अब यह नहीं चलेगा।
रामपुरहाट की क्या स्थिति है, यह आप सभी प्रत्यक्ष देख रहे हो। मालदा में पिछले दिनों क्या हुआ, यह भी पूरे देश ने देखा, जहां अधिकारियों तक को बंधक बना लिया गया। इस भय से बंगाल के लोगों को मुक्ति दिलानी जरूरी है। मां, माटी और मानुष में से मां की स्थिति तो और भी खराब है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति का सम्मान नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा, हमारे एससी-एसटी और ओबीसी समाज की बेटियों के लिए जीना मुश्किल हो गया है। जो टीएमसी देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति तक का अपमान कर सकती है, उसकी मानसिकता क्या होगी? कितना अहंकार होगा। राष्ट्रपति मुर्मु संथाल समाज के एक बड़े कार्यक्रम के लिए यहां आई थीं।
देश में किसी की सरकार हो, संविधान के तहत राष्ट्रपति को उचित सम्मान देना आपका दायित्व है। लेकिन यह अहंकारी टीएमसी सरकार देश की राष्ट्रपति तक को कुछ भी नहीं समझती। सिर्फ इसलिए कि हमारी राष्ट्रपति आदिवासी समाज की बेटी हैं और आपको अपमान करने का हक मिल जाता है। यह देश के संविधान, सभी आदिवासियों और महिलाओं का अपमान है। उन्होंने कहा, पिछले साल की घटना आप सभी को अच्छे से याद होगी। बीरभूम में ही स्कूल में पढ़ने वाली एक आदिवासी बिटिया के साथ जो हुआ, वह बहुत ही परेशान होने वाला है। जिसने अपनी बेटी को खोया है, उसकी भरपाई कोई भी योजना नहीं कर सकती, चाहे कोई कितना भी पैसा दे। यही आरजीकर मेडिकल कॉलेज में हुआ था।
एक डॉक्टर बेटी को हमसे छीन लिया गया। मैं सभी माताओं-बहनों से कहूंगा कि यह चुनाव हमारी बेटियों की सुरक्षा के लिए है। बहनों के लिए हर महीने मदद देने की बात या हर सुविधा भाजपा की हर सरकार बिना कट-कमीशन देती है। जिसका हक है, उसके खाते में पहुंचाती है। भाजपा ने माताओं-बहनों को कई योजनाएं दी हैं, जिन्हें तेजी से लागू किया जाएगा। यह मोदी की गारंटी है।
