370000000 पक्षियों ने उड़ा दी दुनिया की नींद

नई दिल्ली: अमेरिका के कॉर्नेल लैब के बर्डकास्ट के अनुसार, 4 मई की शाम से करीब 37.3 करोड़ प्रवासी पक्षी उत्तर की ओर अपनी यात्रा जारी रखेंगे। इनमें से अधिकांश पक्षी अमेरिका के दक्षिण और पूर्वी तट पर दिखाई देंगे। हालांकि, वन्यजीव विशेषज्ञ उन सभी लोगों से विनम्रतापूर्वक अनुरोध कर रहे हैं जो इन पक्षियों को देखने की उम्मीद कर रहे हैं कि वे नीचे से उन्हें परेशान न करें।वैज्ञानिकों के अनुसार, पक्षी दो मुख्य वजहों से प्रवास करते हैं: भोजन और घोंसले की तलाश में ये पूरी दुनिया में प्रवास करते हैं। आमतौर पर उत्तरी गोलार्ध में इसका मतलब गर्म महीनों के दौरान उत्तर की ओर यात्रा करना होता है, जब कीड़े और नए पौधे प्रचुर मात्रा में होते हैं। ठंडे मौसम में वे ठंड से बचने के लिए दक्षिण की ओर लौट आते हैं। हालांकि, कई पक्षी बर्फीली परिस्थितियों में भी ठीक रहते हैं।

संस्था बर्डकास्ट के पक्षी विज्ञानी यह गणना कैसे करते हैं कि किसी भी रात में कितने पक्षी हवा में होते हैं? गणना का यह मॉडल मुख्य रूप से राष्ट्रीय पर्यावरण पूर्वानुमान केंद्र (NCEP) द्वारा जुटाए गए डेटा और मौसम निगरानी रडार के इस्तेमाल से की जाती है। यह रडार के 23 वर्षों की वायुमंडलीय निगरानी जानकारी पर आधारित है। विभिन्न मौसम स्थितियों और प्रवास अवलोकनों के बीच संभावित संबंधों का अध्ययन शोधकर्ताओं को किसी भी दिन के पूर्वानुमान के लिए कंप्यूटर मॉडल तैयार करने में सक्षम बनाता है।बर्डलाइफ के अनुसार, विश्व के पक्षियों की 40 फीसदी प्रजातियां अब घट रही हैं। प्रवासी पक्षी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, और उनकी घटती संख्या जल की गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा, बाढ़ सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रति कमज़ोर सहनशीलता का कारण बन रही है।

प्रवासन प्राकृतिक जगत के चमत्कारों में से एक है। इससे एक बहुत ही व्यावहारिक सीख भी मिलती है। अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। पक्षी मार्गों की रक्षा करने से पक्षियों की वापसी में मदद मिलती है।अफ्रीका में बर्डलाइफ के सहयोगी और नेचर केन्या के कार्यकारी निदेशक पॉल माटिकू के अनुसार, इन वैश्विक पक्षी के रूट्स को जिंदा रखने में अफ्रीकी महाद्वीप की महत्वपूर्ण भूमिका है। बर्डलाइफ इंटरनेशनल के सीईओ मार्टिन हार्पर कहते हैं-प्रवासन प्राकृतिक जगत के चमत्कारों में से एक है। इससे एक बहुत ही व्यावहारिक सीख भी मिलती है।

अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। पक्षी मार्गों की रक्षा करने से पक्षियों की वापसी में मदद मिलती है। इससे लोगों को भी वास्तविक लाभ मिलते हैं-स्वस्थ आर्द्रभूमि, अधिक विश्वसनीय भोजन और जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक लचीलापन।पक्षियों की कुल संख्या या उनकी उड़ान की दिशा चाहे जो भी हो, प्रवासी पक्षियों को अब पहले से कहीं अधिक चमकदार रात के आकाश में अपना रास्ता खोजना पड़ता है। प्रकाश प्रदूषण केवल आकाश-दर्शन करने वालों और आपकी नींद के चक्र के लिए ही समस्या नहीं है।

शहरों और यातायात से निकलने वाली कृत्रिम रोशनी अनगिनत जानवरों की जैविक लय को बिगाड़ देती है। यह लाखों प्रवासी पक्षियों के लिए सच है, जिनमें एलन हमिंगबर्ड (Selasphorus sasin) और गोल्डन-विंग्ड वार्बलर (Vermivora chrysoptera) जैसी प्रजातियां शामिल हैं।आकाश की चमक आसानी से यात्रा कर रहे पक्षियों को भ्रमित कर सकती है, जिससे वे अपने मार्ग से भटक सकते हैं या थक सकते हैं। इसके परिणाम अक्सर घातक होते हैं, पक्षी अनजाने में इमारतों से टकरा जाते हैं या अपने गंतव्य तक कभी नहीं पहुंच पाते।

विश्व प्रवासी पक्षी दिवस, 2026 की इस बार की थीम रखी गई है-‘हर पक्षी महत्वपूर्ण है, आपका नजरिया मायने रखता है।’ इसका मतलब यह है कि हर पक्षी का संरक्षण किया जाना चाहिए। तो आज ही शुरू हो जाइए और अपने घर के पास पक्षियों के लिए पानी का इंतजाम जरूर करें। साथ ही, रात में कम से कम रोशनी या पटाखे छुड़ाएं, जिससे उनका सफर आसान हो सके।

भारत में हर साल 370 से अधिक प्रजातियों के प्रवासी पक्षी आते हैं, जो भारत के कुल पक्षियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ज्यादातर पक्षी सर्दियों के दौरान आते हैं। ये चिल्का झील (ओडिशा), भरतपुर (केवलादेव नेशनल पार्क, राजस्थान), रन ऑफ कच्छ (गुजरात) और पोंग डैम (हिमाचल प्रदेश) जैसी जगहों पर आते हैं।भारत आने वाले प्रवासी पक्षियों में साइबेरियन क्रेन, फ्लेमिंगो, पेलिकन, बार-हेडेड गूस और ब्लू थ्रोट्स प्रमुख हैं। भारत मुख्य रूप से मध्य एशियाई फ्लाईवे (Central Asian Flyway) का हिस्सा है। ये प्रवासी पक्षी ठंड से बचने और भोजन की तलाश में हजारों किलोमीटर की यात्रा करते हैं।

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