देहरादून। गुरुवार को चालदा देवता की प्रवास यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ा। देवता 39 वर्षों बाद कचटा मंदिर में विराजमान हो रहे हैं। जो यहां पर पांच साल तक प्रवास करेंगे। दोहा से जैसे ही चालदा देवता की पालकी कचटा के लिए रवाना हुई।
दोहा गांव के ग्रामीण देवता की विदाई को लेकर भावुक हो गए। देवता की प्रवास यात्रा में कचटा तक पहुंचने तक आस्था का कारवां बढ़ता चला गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक आयोजन के गवाह बने।बता दें कि जौनसार की 15 खतों में चालदा महाराज का प्रवास एक निश्चित अंतराल पर हो रहता है। जो थैना महासू चालदा देवता मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न खतों में होता है। बाद में देवता अपनी ज्येष्ठ खत कोरू के कचटा मंदिर में होता है।
चालदा महाराज को चलायमान देवता माना जाता है। देवता के लिए चांदी का ढोल और खतों द्वारा संयुक्त रूप से चांदी की पालकी तैयार की गई थी। देवता को चांदी की पालकी में विराजमान किया गया। ढोल से देवता का स्वागत किया गया।कचटा मंदिर में चालदा महाराज के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु पहुंचे। जिन्होंने खत कोरू निवासियों की ओर से किए गए भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। रात्रि में कलाकारों व ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से लोक नृत्यों की प्रस्तुति देकर खुशियां मनाई।
इस अवसर पर खत कोरू सदर स्याणा सुनील जोशी, कचटा गांव स्याणा अमर सिंह चौहान, मंदिर समिति अध्यक्ष सीताराम चौहान, नरेश चौहान, लुदर सिंह, राजेंद्र सिंह, स्वराज सिंह चौहान, बचन सिंह, हाकम सिंह,बहादुर सिंह, श्याम सिंह राठौड़, सूरत सिंह, गामा सिंह, कुंवर सिंह, भारत चौहान, शमशेर सिंह, विरेंद्र सिंह चौहान, संसार सिंह, पूरन सिंह खन्ना, राजेंद्र दत्त शर्मा, मिजान सिंह, बारु सिंह, चंदन सिंह आदि मौजूद रहे।

