हिंडन नदी के किनारे बसीं 258 कॉलोनियों पर चलेगा बुलडोजर

गाजियाबाद: गाजियाबाद शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली हिंडन नदी के आसपास करीब 258 अवैध कॉलोनियां बसी हैं। हैरानी की बात है कि यहां से निकलने वाला गंदा पानी बिना ट्रीट किए ही नदी में डाला जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) को सौंपी गई रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

इस पर डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने साफ कहा कि प्रकृति और नदी के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त से बाहर है। उन्होंने तमाम विभागों के बड़े अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की और हिंडन नदी के किनारों और डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) से अवैध कब्जों को हटाने के आदेश दिए हैं। इसके लिए अभियान चलेगा। लोनी के एसडीएम, जीडीए, सिंचाई विभाग और नगर निगम की संयुक्त टीमें अवैध कब्जों को हटाने और नदी को साफ करने में जुटने जा रही हैं। विशेष पर्यावरण अभियान की प्रोग्रेस रिपोर्ट हर हफ्ते खुद जिला मैजिस्ट्रेट को सौंपी जाएगी।

हिंडन नदी को दूषित करने में सबसे बड़ा हाथ नदी के आसपास बसीं अवैध कॉलोनियां है। मुख्य सचिव एसपी गोयल की ओर से 28 अप्रैल को एनजीटी में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि पूरे उत्तर प्रदेश में ऐसी 888 अवैध कॉलोनियां है जो नदियों को नुकसान पहुंचा रही हैं। इनमें से 258 कॉलोनियां गाजियाबाद में हैं। इन जगहों पर करीब 3.8 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। इन घरों से निकलने वाला सीवेज और गंदा पानी बिना ट्रीट नदी में बहा दिया जाता है, जिससे नदी दूषित हो रही है।

रिपोर्ट में बताया गया कि गाजियाबाद और आसपास के हिंडन-यमुना बेसिन क्षेत्र में कुल 51 ऐसे बड़े और खुले स्टॉर्म ड्रेन है, जो चौबीसों घंटे नदी में जहर उगल रहे है। इन नालों के जरिए रोजाना करीब 1,067 MLD (मिलियन लीटर प्रतिदिन) गंदा पानी, फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल, गाढ़ा कीचड़ और सीवेज सीधे हिंडन, यमुना और उनकी सहायक नदियों में मिल रहा है। प्रशासन का कहना है कि नदी की मूल जमीन (रिवरबेड) पर जो अवैध कब्जे या फैक्ट्रिय बनी हैं उन सभी को पूरी तरह से साफ किया जाएगा।

सरकारी सर्वे के मुताबिक करहेड़ा, अटौर-नगला और कनावनी में सबसे ज्यादा अतिक्रमण हैं। यहां लोगों ने नदी की जमीन पर पक्के मकान बना लिए है। अब नदी के फ्लडप्लेन का पूरी तरह से सीमांकन किया जा रहा है, जिसके बाद यहां बड़े स्तर पर तोड़फोड़ अभियान शुरू होगा। डीएम ने साफ किया कि आगामी मॉनसून को देखते हुए यह कदम उठाना बेहद जरूरी है। अगर नदी का रास्ता साफ नहीं किया गया तो बारिश के दिनों मे पानी रिहायशी इलाको में घुस जाएगा और बाढ़ का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

डीएम रविद्र कुमार मांदड़ ने अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे मौके पर जाकर कार्रवाई करें। सिंचाई विभाग के पुराने नक्शे, जमीनी डेटा और राजस्व (कागजी) रेकॉर्ड्स का आपस में मिलान किया जाए। इससे साफ हो जाएगा कि नदी की मूल जमीन कहां तक थी और लोगों ने कहां तक कब्जे किए है। टीमें इन सरकारी कागजातों के आधार पर एक-एक अवैध निर्माण को चिह्नित करेंगी ताकि कोई अड़चन न आए और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया जा सके।

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