हरिद्वार: 2027 अर्धकुंभ मेले से पहले अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद को लेकर साधु में गुटबाजी लगातार जारी है. 27 जून देर शाम हरिद्वार के कनखल स्थित श्री पंचायती शंभू अटल अखाड़े में बैठक की गई. बैठक में अखाड़ों के एक गुट ने नई कार्यकारिणी का गठन किया और आठ अखाड़े साथ लेकर बहुमत साबित करने का दावा किया. इस दौरान महानिर्वाणी अखाड़ा, निर्मल अखाड़ा, अटल अखाड़ा, बड़ा अखाड़ा, नया अखाड़ा, तीन बैरागी अखाड़ों में दिगंबर, निर्वाणी और निर्मोही अखाड़े के साधु संत मौजूद रहे. बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की नई कार्यकारिणी की घोषणा की गई.
घोषणा में महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष, निर्मोही अखाड़े के श्रीमहंत राजेंद्र दास महाराज को महामंत्री, श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा से महंत दुर्गादास को उपाध्यक्ष, निर्मल अखाड़े से जसविंदर सिंह शास्त्री को कोषाध्यक्ष, दिगंबर अखाड़े के महंत वैष्णों दास महाराज को मंत्री, नया अखाड़े के श्रीमहंत भगतराम महाराज, महानिर्वाणी अखाड़े के मुरली दास महाराज और महंत ज्ञानदेव सिंह को संरक्षक, महामंडलेश्वर करौली शंकर दास को मीडिया संयोजक और महंत संजय दास को राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया गया.
बहुमत के आधार पर अखाड़ा परिषद का गठन होता है. 13 में से 8 अखाड़ों ने बहुमत साबित कर दिया और नई कार्यकारिणी का गठन किया है. किसी भी कुंभ और राष्ट्र से संबंधित जो भी गतिविधियां होंगी, उन सब में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया जाएगा. दो दिन बाद प्रशासन के साथ बैठक होगी और बैठक में जो भी विषय सामने आएगा, उसकी जानकारी दी जाएगी.
देश में 13 अखाड़े हैं. जिनमें से आठ अखाड़ों ने मिलकर अखाड़ा परिषद के नए अध्यक्ष के रूप में निर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अपना अध्यक्ष अगले पांच साल के लिए चुना है. देश में जहां-जहां भी कुंभ मेले का आयोजन होगा, वहां सरकार के साथ मिलकर व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी.
गौर है कि 2027 हरिद्वार कुंभ मेले से पूर्व अखाड़ा परिषद से जुड़े साधु संतों में दो फाड़ नजर आ रही है. क्योंकि पूर्व में एक अखाड़ा परिषद का गठन किया गया था, जिसमें निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज को अध्यक्ष और जूना अखाड़े के श्रीमहंत हरिगिरि महाराज को महामंत्री चुना गया गया था. इन साधु संतों ने भी बहुमत का दावा कई बार किया है. लेकिन अब सीधे तौर पर अखाड़ा परिषद दो गुटों में बंटी नजर आ रही है.
