नई दिल्ली: सरकारी तेल कंपनियों ने रविवार को घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की। इसके बाद केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है। मंत्रालय का कहना है कि इस बढ़ोतरी के बाद भी भारतीय परिवारों को दुनिया के अन्य देशों के मुकाबले सबसे सस्ती दरों पर रसोई गैस मिल रही है।
पश्चिम एशिया (खाड़ी देशों) में चल रहे युद्ध के कारण यह दूसरी बड़ी बढ़ोतरी है, जिससे घरेलू सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये महंगे हो चुके हैं। इस नए बदलाव के बाद दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये हो गई है। मंत्रालय के बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थी को 14.2 किलो का सिलेंडर 642 रुपये में मिलता है। वहीं सामान्य उपभोक्ता दिल्ली में इसे 942 रुपये में खरीदता है। जबकि इसकी वास्तविक आपूर्ति लागत अब 1600 रुपये से अधिक हो चुकी है। ऐसे में तेल कंपनियों को एक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान हो रहा है।
मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पड़ोसी पाकिस्तान जैसे देशों में गैस की दरें भारत के मुकाबले कहीं ज्यादा हैं। दूसरे देशों में एलपीजी का भाव इस प्रकार है:मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसके बावजूद केंद्र सरकार अंतरराष्ट्रीय उतार-चढ़ाव का पूरा बोझ खुद उठा रही है और इसे आम उपभोक्ताओं पर नहीं डाल रही है।
सरकार हर सामान्य सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा खुद बर्दाश्त कर रही है। वहीं उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को सरकार सालाना पहले 4 रिफिल पर 300 रुपये की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) दे रही है, जिससे उन्हें यह सिलेंडर केवल 642 रुपये में पड़ रहा है।भारत पहले अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता था। इसका आयात मूल्य सऊदी अरब द्वारा तय किए जाने वाले सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस पर आधारित होता है, जो हर महीने की शुरुआत में तय होता है।
फरवरी में यानी संकट से पहले एलपीजी का दाम लगभग 543 डॉलर प्रति टन था। फरवरी के अंत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद अप्रैल में यह बढ़कर 775 डॉलर प्रति टन हो गया। जून में यह और बढ़कर लगभग 790 डॉलर प्रति टन हो गया।इस तरह एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क फरवरी के स्तर की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत बढ़ चुका है। मंत्रालय ने कहा कि इसी वजह से आयातित एलपीजी की लागत भी बढ़ी है। यही कारण है कि सरकार को घरेलू एलपीजी के दाम में बढ़ोतरी करनी पड़ी।
