‘रोबोट ने जीती जंग’

नई दिल्लीः बंदूकों से लैस मानवरहित वाहनों (किलर ड्रोन) की सेना ने धावा बोला और अपनी फायरिंग से दुश्मन देश की सेना की टुकड़ी को बेबस कर दिया. अंत में हालात ये बन गए कि दुश्मन देश के सैनिकों को एक शर्मनाक हार का सामना करते हुए अपने मशीनी दुश्मनों के सामने आत्मसमर्पण करने पर मजबूर होना पड़ा. यह कोई कल्पना नहीं है, बल्कि यूक्रेन-रूस युद्ध में यह नजारा हकीकत बना.

द सन की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने दावा किया है कि रोबोट की ताकत के दम पर जंग में हासिल की गई ये दुनिया की पहली जीत है. युद्ध के इतिहास में यह पहली बार है कि अकेले ड्रोन ने रूस द्वारा कब्जा की गई जमीन को वापस हासिल किया है, और वह भी बिना किसी मानवीय जान के नुकसान के.जेलेंस्की ने ये स्पष्ट जानकारी नहीं दी है कि मिशन के दौरान इन रोबोट को कैसे नियंत्रित किया गया है. विशेषज्ञों ने कई बात चिंता व्यक्त की है, कहीं ये मशीनी दानव अनियंत्रित न हो जाएं.यूक्रेन ने रूस के खिलाफ युद्ध में कई किलर ड्रोन को तैनात किया है. इसके अलावा स्वचालित मिनी-टैंकों को अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर रहा है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन के इन जानलेवा रोबोटों ने सिर्फ तीन महीनों में 22,000 से ज़्यादा मिशन पूरे किए हैं. इससे हजारों इंसानी जानें बची हैं.X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संबोधन में, राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, युद्ध के मैदान में भविष्य यहीं है. और यूक्रेन इसे रच रहा है. इस युद्ध के इतिहास में पहली बार, दुश्मन के एक ठिकाने पर पूरी तरह से मानवरहित GRS प्लेटफॉर्म और ड्रोन द्वारा कब्जा किया गया. कब्जा करने वालों ने आत्मसमर्पण कर दिया, और यह अभियान बिना पैदल सेना की भागीदारी के और हमारी तरफ बिना किसी नुकसान के पूरा हुआ.

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