मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी ताजा समीक्षा बैठक में सर्वसम्मति से मुख्य नीतिगत दर यानी रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा की कि केंद्रीय बैंक अपना ‘न्यूट्रल’ रुख जारी रखेगा. इस फैसले का सीधा मतलब यह है कि देश के करोड़ों लोन उपभोक्ताओं की होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ईएमआई पर फिलहाल कोई नया बोझ नहीं पड़ेगा.पश्चिम एशिया के बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, ईंधन की ऊंची कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं को देखते हुए आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए अपने आर्थिक अनुमानों में बड़ा बदलाव किया है.
गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि अभूतपूर्व वैश्विक चुनौतियों के कारण दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. कमजोर वैश्विक मांग और उच्च लॉजिस्टिक्स लागत के कारण भारतीय निर्यात क्षेत्र को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. इसके अतिरिक्त, कच्चे तेल और ऊर्जा की लगातार बढ़ती कीमतें देश के चालू खाता घाटे (CAD) के जोखिम को बढ़ा रही हैं. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे की मौद्रिक नीति पूरी तरह ‘डेटा-डिपेंडेंट’ रहेगी.
तमाम अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं के बावजूद, आरबीआई गवर्नर ने भरोसा जताया कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी मजबूत और स्थिर बनी हुई हैं. भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी बाहरी झटके का सामना करने के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह है. एक्सचेंज रेट पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं किया गया है और आरबीआई रुपये के लिए किसी विशेष दर या बैंड को लक्षित नहीं कर रहा है.
अर्थव्यवस्था की उत्पादक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आरबीआई बैंकिंग प्रणाली में पर्याप्त लिक्विडिटी बनाए रखना जारी रखेगा. इसके साथ ही, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के निवेश नियमों को आसान बनाया गया है. इसके अलावा, अनिवासी भारतीयों (NRI) और प्रवासी भारतीय नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश की सीमा को भी बढ़ा दिया गया है.
