साहित्यिक सरोकारों को नई ऊर्जा दे रहा साईं सृजन पटल : डॉ.चौधरी

डोईवाला। साहित्य, रचनात्मकता और बौद्धिक संवाद को समर्पित मासिक पत्रिका साईं सृजन पटल के 19वें अंक का भव्य विमोचन डी.डब्ल्यू.टी. कॉलेज, देहरादून की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विनीता चौधरी ने किया। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यप्रेमियों, रचनाकारों और बुद्धिजीवियों ने पत्रिका की निरंतर प्रगति और साहित्यिक योगदान की सराहना करते हुए इसे रचनात्मक अभिव्यक्ति का सशक्त मंच बताया।

विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. विनीता चौधरी ने कहा कि साईं सृजन पटल जैसी साहित्यिक पत्रिकाएँ समाज में रचनात्मकता, विचारशीलता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। यह मंच नवोदित और वरिष्ठ लेखकों को अपनी अभिव्यक्ति के लिए समान अवसर प्रदान कर रहा है। ऐसी पहलें हिंदी साहित्य के संरक्षण और संवर्धन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इस अवसर पर पटल के संस्थापक एवं पत्रिका के मुख्य संपादक प्रो. (डॉ.) के. एल. तलवाड़ ने कहा कि साईं सृजन पटल का उद्देश्य साहित्य, समाज और संस्कृति के विविध आयामों को एक मंच पर लाना है। हमारा निरंतर प्रयास है कि देश-प्रदेश के रचनाकारों को अपनी प्रतिभा को प्रस्तुत करने का अवसर मिले तथा साहित्यिक संवाद को नई ऊर्जा प्राप्त हो।हमारा प्रयास है कि यह मंच साहित्य, समाज और संस्कृति के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में निरंतर कार्य करता रहे।

पत्रिका के उपसंपादक अंकित तिवारी ने कहा कि साईं सृजन पटल केवल एक पत्रिका नहीं, बल्कि रचनात्मक विचारों का सशक्त मंच है। यह युवा और नवोदित लेखकों को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर प्रदान कर रहा है।कार्यक्रम में ग्राम पंचायत विकास अधिकारी आशा रणाकोटी ने कहा कि ऐसी साहित्यिक गतिविधियाँ समाज में सकारात्मक सोच, जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देती हैं। साईं सृजन पटल द्वारा साहित्य और सामाजिक सरोकारों को जोड़ने का जो प्रयास किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है।

इस अवसर पर डॉ. विनीता चौधरी को उनके साहित्यिक योगदान और सृजनात्मक लेखन के लिए साईं सृजन पटल का प्रतिष्ठित लेखक श्री सम्मान प्रदान कर सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि पत्रिका में उनके कई महत्वपूर्ण आलेख प्रकाशित हुए हैं, जिनमें पिरूल के कौशल द्वारा आजीविका संवर्धन का विकास, कुमाऊँ के रस-भात का स्वाद व स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण की मिसाल लीफ आर्टिस्ट, रंगवाली पिछौड़ा, चितई के गोलू देवता, अल्मोड़ा का दशहरा पर्व, ऐपण, घुघुतिया पर्व तथा कुमाऊँ का होली गायन जैसे विषय शामिल हैं, जो उत्तराखंड की लोक संस्कृति, परंपराओं और आजीविका से जुड़े विविध आयामों को उजागर करते हैं।आशा रणाकोटी को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में मनोज चौधरी, पटल की नीलम तलवाड़ तथा इनसाइडी क्रिएटिव मीडिया के सीईओ अक्षत सहित अन्य साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने पत्रिका के 19वें अंक के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे साहित्यिक जगत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

समारोह का वातावरण साहित्यिक उत्साह और रचनात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहा तथा उपस्थित सभी अतिथियों ने साईं सृजन पटल की इस सतत साहित्यिक यात्रा के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।

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