ट्रंप का ‘किल ऑर्डर’!

नई दिल्लीः जब पूरी दुनिया की नजरें कल होने वाली ‘इस्लामाबाद शांति वार्ता’ पर टिकी थीं, ठीक उसी समय व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस से निकले एक ‘किल ऑर्डर’ ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक के बाद एक दो ऐसे पोस्ट किए हैं, जो शांति की उम्मीदों पर बारूद बनकर गिरे हैं.

ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को साफ आदेश दिया है- होर्मुज जलसंधि (Strait of Hormuz) में जो भी ‘माइंस’ बिछाते दिखे, उसे बिना सोचे ‘शूट एंड किल’ (Shoot and Kill) कर दो. इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी दावा कर दिया है कि ईरान के 159 जहाज पहले ही समुद्र की गहराई में दफन हो चुके हैं.पिछले कुछ घंटों में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिले थे कि ईरान की छोटी नावें (Swarm Boats) रात के अंधेरे में होर्मुज जलसंधि के संकरे रास्तों में बारूदी सुरंगें (Mines) बिछा रही हैं. ये सुरंगें अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों के लिए ‘सुसाइड बॉम्बर’ की तरह हैं. ट्रंप ने अपनी ‘Peace through Strength’ नीति के तहत साफ कर दिया है कि अब कोई चेतावनी नहीं दी जाएगी, सीधा एक्शन होगा.

ट्रंप ने अपने पोस्ट में कोष्ठक (brackets) में लिखा- (Their naval ships are ALL, 159 of them, at the bottom of the sea!). यह 2026 की शुरुआत से अब तक की गई अमेरिकी एयर स्ट्राइक्स और साइबर-नेवल हमलों का कुल आंकड़ा माना जा रहा है. ट्रंप यह संदेश देना चाहते हैं कि ईरान की मुख्य नौसैनिक शक्ति पहले ही ध्वस्त की जा चुकी है और अब वे केवल छोटी नावों से ‘गुरिल्ला वार’ की कोशिश कर रहे हैं.ट्रंप के दूसरे पोस्ट के मुताबिक, होर्मुज जलसंधि को “Sealed up Tight” यानी मजबूती से सील कर दिया गया है. अमेरिकी नौसेना की अनुमति के बिना अब कोई भी जहाज इस रास्ते से न तो प्रवेश कर सकता है और न ही बाहर जा सकता है. ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान कोई ठोस ‘डील’ नहीं करता, यह रास्ता अमेरिका की मर्जी से ही खुलेगा.

ट्रंप का दावा है कि ईरान इस समय ‘लीडरलेस’ है. वहां के कट्टरपंथी (Hardliners) युद्ध के पक्ष में हैं लेकिन मोर्चे पर हार रहे हैं, जबकि उदारवादी (Moderates) इज्जत पा रहे हैं लेकिन कमजोर हैं. ट्रंप इस आंतरिक कलह का फायदा उठाकर ईरान को पूरी तरह सरेंडर करने पर मजबूर करना चाहते हैं.अमेरिका के पास दुनिया के सबसे एडवांस ‘माइन स्वीपर्स’ (सुरंग हटाने वाले जहाज) हैं. ट्रंप ने आदेश दिया है कि इन जहाजों की गतिविधि को 3 गुना (Tripled up) बढ़ा दिया जाए. वे चाहते हैं कि कल की इस्लामाबाद बैठक से पहले रास्ता ‘क्लीन’ हो ताकि अमेरिका अपनी शर्तों पर तेल की सप्लाई बहाल कर सके.

इसका सबसे बड़ा “क्यों” कल होने वाली इस्लामाबाद समिट में छिपा है. ट्रंप चाहते हैं कि जब उनके प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी में टेबल पर बैठें, तो उनके पीछे ‘ताकत की ऐसी गर्जना’ हो कि ईरान के पास ‘हां’ कहने के अलावा कोई विकल्प न बचे. वे यह साबित करना चाहते हैं कि अमेरिका की आर्थिक और सैन्य शक्ति आज भी दुनिया में सबसे बड़ी है.

यह केवल एक युद्ध की खबर नहीं है, यह ‘नई ग्लोबल ऑर्डर’ की शुरुआत है. ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र (International Waters) के नियमों को अपनी शर्तों पर चलाएंगे. अगर यह ‘किल ऑर्डर’ जमीन पर उतरता है और ईरान पलटवार करता है, तो कल की इस्लामाबाद बैठक बेमानी हो जाएगी और दुनिया फिर एक बड़े युद्ध में कूद जाएगी.

24 अप्रैल को इस्लामाबाद से आने वाली खबरें ये तय करेंगी कि ट्रंप के इस ‘धमाके’ ने ईरान को बातचीत के लिए झुका दिया है या मामला और बिगड़ गया है. अगर ईरान की ओर से कोई भी जवाबी कार्रवाई (Retaliation) होती है, तो होर्मुज का पानी लाल होना तय है.हां, ट्रंप का ‘No hesitation’ (बिना हिचकिचाहट) वाला आदेश यही कहता है कि अगर माइंस बिछाने का शक हुआ, तो कार्रवाई तुरंत होगी.

अभी तक बैठक रद्द होने की कोई खबर नहीं है. पाकिस्तान ने सभी सुरक्षा इंतजाम किए हैं, लेकिन ट्रंप के आदेश ने वहां तनाव बढ़ा दिया है.चूंकि ट्रंप ने ‘Total Control’ की बात कही है, इसलिए उस क्षेत्र से गुजरने वाले हर व्यापारिक जहाज को अब अमेरिकी नौसेना के सुरक्षा प्रोटोकॉल को फॉलो करना होगा.यह डेटा ट्रंप ने अपने मिलिट्री ब्रीफिंग के आधार पर दिया है. हालांकि, ईरान ने अभी तक इतने बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं की है.

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