DRDO को मिले ज्यादा वित्तीय अधिकार

नई दिल्ली/देहरादून: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO के लिए नई वित्तीय शक्तियों का ढांचा लागू किया है. इससे रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं को तेजी मिलने और स्वदेशी रक्षा तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. रक्षा मंत्री ने कहा कि डीएफपी-2026 अनुसंधान एवं विकास से विकसित प्रणालियों, प्लेटफॉर्मों और प्रौद्योगिकियों के शीघ्र उत्पादन तथा उन्हें सशस्त्र बलों में तेजी से शामिल किए जाने में मदद करेगा.

DFP-2026 लॉन्च: देश की रक्षा अनुसंधान और विकास परियोजनाओं को गति देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के लिए नया डेलीगेशन ऑफ फाइनेंशियल पॉवर्स-2026 (DFP-2026) जारी किया. सरकार का दावा है कि इस नई व्यवस्था से रणनीतिक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, जवाबदेही बढ़ेगी और रक्षा बलों के लिए विकसित की जा रही तकनीकों तथा प्रणालियों को समय पर उपलब्ध कराया जा सकेगा.

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, DFP-2026 का उद्देश्य रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यात्मक अधिकारों को मजबूत बनाना है. नई व्यवस्था के तहत वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और सरल बनाया गया है, जिससे परियोजनाओं में होने वाली अनावश्यक देरी को कम किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इससे रक्षा क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा.

रक्षा क्षेत्र में अक्सर अनुसंधान परियोजनाओं को मंजूरी मिलने, परीक्षणों के लिए धन उपलब्ध होने और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण समय अधिक लग जाता है. नई वित्तीय शक्तियों के तहत DRDO के अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे कई निर्णय विभागीय स्तर पर ही लिए जा सकेंगे. इससे परियोजनाओं की गति बढ़ने और रक्षा बलों तक नई तकनीकों की आपूर्ति समय पर सुनिश्चित होने की उम्मीद है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि-DFP-2026 रक्षा अनुसंधान प्रणाली से निकलने वाली तकनीकों, प्लेटफॉर्म और प्रणालियों के तेजी से उत्पादन तथा सैन्य सेवाओं में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा. यह व्यवस्था उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग को भी मजबूत बनाएगी, जिससे देश में रक्षा क्षेत्र का नवाचार तंत्र और सशक्त होगा.

नई व्यवस्था में परीक्षण अभियानों, ट्रायल, मूल्यांकन गतिविधियों और परियोजना पूर्व अनुसंधान कार्यों के लिए अलग वित्तीय प्रावधान किए गए हैं. इसके अलावा एक्स्ट्रा-म्यूरल रिसर्च प्रोजेक्ट्स, डिफेंस इनोवेशन एक्सीलरेटर-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी योजनाओं के लिए भी वित्तीय अधिकारों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग परिभाषित किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम रक्षा अनुसंधान क्षेत्र में काम कर रहे विश्वविद्यालयों, स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाएगा। इससे रक्षा क्षेत्र में सार्वजनिक और निजी भागीदारी को बढ़ावा मिलने की संभावना है.

सरकार लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी तकनीकों के विकास को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है. इसी कड़ी में DFP-2026 को एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है. रक्षा मंत्री ने कहा कि यह व्यवस्था आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करेगी और देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती प्रदान करेगी. विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अनुसंधान परियोजनाओं को समय पर वित्तीय मंजूरी और संसाधन उपलब्ध होते हैं, तो मिसाइल प्रणाली, निगरानी उपकरण, संचार तकनीक, ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रक्षा प्रणालियों और अन्य उन्नत तकनीकों के विकास में तेजी आ सकती है. इसका सीधा लाभ भारतीय सशस्त्र बलों को मिलेगा.

नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, रक्षा सचिव एवं DRDO अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, पूर्व सैनिक कल्याण सचिव सुकृति लिखी, नियंत्रक महालेखा रक्षा लेखा अनुराग नारायण दास सहित DRDO और रक्षा मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. रक्षा मंत्रालय का मानना है कि DFP-2026 केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि भविष्य की रक्षा चुनौतियों के अनुरूप अनुसंधान और विकास तंत्र को अधिक सक्षम बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है. इससे रक्षा परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, स्वदेशी तकनीकी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *