पहाड़ी राज्यों में बारिश-भूस्खलन से भारी तबाही

नई दिल्लीः देश के कई हिस्सों में मानसून का असर अलग-अलग रूप में दिखाई दे रहा है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जहां मानसून की रफ्तार थमी है, वहीं पहाड़ी राज्यों में बारिश के चलते नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। शनिवार रात जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बादल फटने के बाद बाढ़ आई।

घरों में पानी भर गया, खेत डूब गए और सड़कें बह गईं। उत्तराखंड के विकासनगर में भारी बारिश के कारण लखवाड़ हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास लैंडस्लाइड हुआ। कई गाड़ियां और मशीनें मलबे में दब गईं। प्रदेश में 126 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में भूस्खलन के चलते केदारनाथ यात्रा बाधित हो गई है। केदारनाथ हाइवे पर भूस्खलन के बाद भारी मात्रा में पहाड़ का मलबा सड़क पर फैल गया। प्रशासन मलबे को हटाने में जुटी है।

मौसम विभाग (आईएमडी) ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और उत्तराखंड में अगले 24 घंटे में भारी बारिश, भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। इधर, पुणे के पास मोशी स्थित वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट में इमारत गिरने के हादसे में लापता आखिरी व्यक्ति का शव भी रविवार तड़के बरामद कर लिया गया। इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है।

बचाव दल ने तलाशी अभियान पूरा होने के बाद इसे समाप्त कर दिया। वायनाड में गत दिनों हुए भूस्खलन की घटना में एक शव और बरामद कर लिया गया है। इसके विपरीत, देश के उत्तर-पश्चिम व मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश की गतिविधियां कमजोर पड़ गई हैं। वजह पाकिस्तान की ओर से आ रही गर्म और सूखी पश्चिमी हवाएं हैं। वातावरण की नमी कम हो रही है, बादल कम बन रहे हैं। इससे दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में अपेक्षित बारिश नहीं हो रही है। उमस व गर्मी बनी हुई है।

मौसम विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, देश के 70% हिस्से से मानसून के बादल गायब होने के पीछे सबसे बड़ी वजह मानसून को सक्रिय रखने वाले सिस्टम का कमजोर पड़ना है। 9 जुलाई के बाद बंगाल की खाड़ी में कोई नया मजबूत लो-प्रेशर सिस्टम नहीं बना, जिससे मानसूनी हवाओं को पर्याप्त नमी नहीं मिल सकी। इसके साथ ही मानसून ट्रफ भी अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर खिसक गई है। इसकी वजह से मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के बड़े हिस्से में बादल और बारिश की गतिविधियां काफी कम हो गई हैं। फिलहाल बारिश मुख्य रूप से उत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और पूर्वोत्तर तक सीमित है। आईएमडी का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों तक देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून के फिर से एक्टिव होने की संभावना कम है।

विभाग का अनुमान है कि प्रशांत महासागर में 3 नए सिस्टम बन रहे हैं, अगर इनमें से एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंच गया तो मानसून फिर से एक्टिव हो सकता है।रविवार को उत्तराखंड में भूस्खलन हुआ, जिससे दो नेशनल हाईवे समेत 126 सड़कें बंद हो गईं। देहरादून में दीवार गिरने से एक महिला घायल हो गई और सात परिवारों को अपना घर खाली करना पड़ा। यमुनोत्री हाईवे पर मरम्मत का काम चल रहा है, जो स्यानचट्टी में लैंडस्लाइड की वजह से पिछले तीन दिनों से बंद है।

रविवार को मुंबई के मरीन ड्राइव पर समुद्र में ऊंची लहरें उठते हुए देखी गईं। मौसम विभाग ने देश के कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। असम, मेघालय, बिहार, बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल, छत्तीसगढ़, पूर्वी यूपी, झारखंड और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में चिनाब नदी में उफान आने से सलाल डैम के कई गेट खोल दिए गए हैं। केरल के वायनाड में सुरंग परियोजना स्थल पर हुए भूस्खलन के छह दिन बाद रविवार को निर्माण प्रबंधक विक्रम राणा का शव बरामद किया गया। इससे मृतक संख्या बढ़कर 8 हो गई है। राणा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के रहने वाले थे।

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