बागेश्वर। उत्तराखंड के पर्वतीय अंचल में स्थित विश्व प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर एक बार फिर पर्यटन गतिविधियों से गुलजार हो उठा है। पर्यटन सीजन के शुभारंभ के साथ ही यहां देश-विदेश से पर्यटकों की आमद शुरू हो गई है। इसी क्रम में अमेरिका से आए विदेशी पर्यटकों का एक दल कपकोट क्षेत्र के मल्ला दानपुर पहुंचा, जहां उन्होंने हिमालय की अद्वितीय प्राकृतिक संपदा और स्थानीय जीवनशैली का निकट से अवलोकन किया।
हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच फैले बुग्याल इस क्षेत्र की आत्मा माने जाते हैं। ये बुग्याल, जो गर्मियों में मखमली हरे कालीन की तरह दूर-दूर तक फैले दिखाई देते हैं, अपने भीतर प्रकृति की अनुपम छटा समेटे हुए हैं। रंग-बिरंगे जंगली फूलों से सजे ये घास के मैदान सुबह की ओस और सूर्य की किरणों के साथ एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो प्रकृति ने स्वयं इन बुग्यालों को अपने सबसे सुंदर रंगों से सजाया हो।
विदेशी पर्यटकों ने इन बुग्यालों की विशालता, शांति और प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण अत्यंत शांत, स्वच्छ और आध्यात्मिक अनुभूति कराने वाला है, जो आधुनिक जीवन की आपाधापी से बिल्कुल भिन्न है।मल्ला दानपुर क्षेत्र के उच्च हिमालयी गांवों में आज भी जीवन सदियों पुरानी परंपराओं के अनुरूप संचालित होता है। यहां के निवासी भेड़ और घोड़ों के पालन-पोषण पर निर्भर हैं और पशुओं के लिए चारा जुटाने की पारंपरिक पद्धतियों का अनुसरण करते हैं। प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन यापन करने की यह शैली विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
स्थानीय जनजीवन, पारंपरिक संस्कृति और बुग्यालों की मनमोहक छटा का यह अनूठा संगम ही पिंडारी ग्लेशियर को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के साथ पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, तो यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक लोकप्रिय हो सकता है।पर्वतीय संस्कृति, प्राकृतिक सौंदर्य और सादगी भरे जीवन का यह अद्भुत मेल ही असली पहाड़ की पहचान है, जो अब दुनिया भर के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।

