वेतन वृद्धि को लेकर श्रमिक का कंपनी में हंगामा

रुद्रपुर: सेक्टर-9 स्थित महालक्ष्मी पॉली पैक प्लास्टिक कंपनी में सोमवार को उस समय विवाद गहरा गया जब बड़ी संख्या में मजदूरों ने कंपनी गेट के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया. मजदूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन वर्षों से उनका शोषण कर रहा है, सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है. वहीं कंपनी प्रबंधन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन दिया जा रहा है. मामले की जानकारी मिलने के बाद श्रम विभाग भी सक्रिय हो गया है.

सेक्टर-9 स्थित महालक्ष्मी पॉली पैक प्राइवेट लिमिटेड प्लास्टिक कंपनी, जहां बोरी और त्रिपाल बनाने का कार्य किया जाता है, वहां मजदूरों और कंपनी प्रबंधन के बीच वेतन तथा अन्य श्रमिक सुविधाओं को लेकर विवाद सामने आया है. सोमवार को सुबह निर्धारित समय से बड़ी संख्या में मजदूर कंपनी के मुख्य गेट पर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी मजदूरों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन लगातार उनका आर्थिक और मानसिक शोषण कर रहा है तथा उनकी समस्याओं को सुनने के लिए तैयार नहीं है.

मजदूरों का कहना है कि सरकार द्वारा समय-समय पर न्यूनतम वेतन और श्रमिक हितों को लेकर नई गाइडलाइन जारी की जाती हैं, लेकिन कंपनी प्रबंधन इन नियमों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा है. प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने बताया कि कई कर्मचारी पिछले 10 से 15 वर्षों से कंपनी में कार्यरत हैं,

इसके बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं और सम्मान नहीं मिल रहा है. कंपनी में पिछले 14 वर्षों से कार्यरत मजदूर सुनील यादव ने बताया कि यदि कोई कर्मचारी किसी कारणवश दो दिन की छुट्टी ले लेता है तो उसका वेतन काट लिया जाता है.

उन्होंने आरोप लगाया कि एक मजदूर से एक साथ कई मशीनों पर काम कराया जाता है, जिससे कार्य का दबाव बढ़ जाता है. वर्कर सुनील यादव ने यह भी कहा कि जब मजदूर अपनी समस्याएं या मांगें प्रबंधन के सामने रखते हैं तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है.

सुनील यादव ने वेतन भुगतान प्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि श्रम नियमों के अनुसार पूरा वेतन बैंक खाते में आना चाहिए, लेकिन कंपनी द्वारा कथित रूप से आधा भुगतान नकद और आधा बैंक खाते में किया जाता है. उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पीएफ और ईएसआई से संबंधित अंशदान नियमित रूप से जमा नहीं किए जा रहे हैं.

अब सभी की नजर श्रम विभाग की जांच और कंपनी प्रबंधन तथा मजदूरों के बीच होने वाली वार्ता पर टिकी हुई है. मजदूरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रह सकता है.

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