नई दिल्लीः अमेरिकी सेना को बेजोड़ बनाने के लिए ट्रंप सरकार युद्ध के मैदान में AI को शामिल करने की सिफारिश कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का मानना है कि सेना को इस तकनीक का हर तरीके से इस्तेमाल करने का अधिकार मिलना चाहिए। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप चीन से आगे रहने के लिए आखिरी समय पर AI पर पाबंदी लगाने से जुड़ा एक आदेश रोक चुके हैं। गौर करने वाली बात है कि सेना के शीर्ष अधिकारियों, कमांडरों और कुछ बड़ी टेक कंपनियों ने सेना में AI के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। ये लोग युद्ध में बिना इंसानी कंट्रोल वाले घातक हथियार इस्तेमाल करने को लेकर सतर्क रहने की चेतावनी दे रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक US स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के प्रमुख, एडमिरल फ्रैंक ब्रैडली का साफ कहना है कि सेना को AI के इस्तेमाल और उसके जरिए घातक हमलों को अंजाम देनें में सावधानी बरतनी चाहिए। बैडली एक कॉन्फ्रेंस में कह चुके हैं कि भविष्य मे भले AI तय करे कि हमले का टारगेट कौन होगा लेकिन इंसानों को भरोसा होना चाहिए कि यह तकनीक हिंसा सिर्फ वहीं करेगी जहां हम असल में चाहते हैं।इसी तरह एयरफोर्स के लेफ्टिनेंट जनरल माइकल कॉनले ने बताया कि ईरान युद्ध के दौरान ड्रोन ऑपरेटरों के साथ तुरंत खुफिया जानकारी शेयर करने के लिए AI बॉट्स का इस्तेमाल किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक पेंटागन के एक अधिकारी ने बताया कि AI का काम युद्ध के मैदान में दुश्मनों की पहचान को तेज करना होगा ताकि उन पर तुरंत सटीक हमले हो सकें।एक स्टडी के मुताबिक, अमेरिकी सेना के 18वें एयरबोर्न कॉर्प्स ने AI की मदद से 2,000 कम सैनिकों के बावजूद बेहद सटीक आर्टिलरी हमले किए।वहीं, सेना के कुछ अन्य अधिकारी AI को सिर्फ एक एडमिनिस्ट्रेटिव टूल की तरह देखते हैं, जो सैनिकों का कागजी काम और मानसिक बोझ कम करेगा ताकि वे मुख्य मिशन पर ध्यान दे सकें। रिपोर्ट्स की मानें, तो AI दोनों ही रूपों में सेना में काम कर रहा है।
सेना में AI के इस्तेमाल को लेकर पेंटागन और टेक कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ के बीच पहले ही सार्वजनिक रूप से जंग छिड़ गई है। एंथ्रोपिक के साईओ डारियो अमोदेई ने अपने AI मॉडल Claude का इस्तेमाल पूरी तरह ऑटोमैटिक हथियारों या लोगों की निगरानी के लिए करने से मना कर दिया है।इसके बाद ट्रंप सरकार ने कंपनी पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाते हुए उसका 200 मिलियन डॉलर का डिफेंस कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था और उसे ब्लैकलिस्ट भी कर दिया था। अब अमेरिकी सरकार AI तकनीक के लिए Google और OpenAI जैसी कंपनियों का रुख कर रही है।
