नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होने की प्रबल संभावना है. यह सत्र लगभग तीन सप्ताह चलेगा. सूत्रों की माने तो सरकार 19 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुला सकती है.आनेवाले मानसून संसद का सत्र काफी हंगामेदार होने की संभावना है. इससे पहले ही इंडिया गठबंधन की पार्टियां लामबद्ध होकर सरकार पर हमला बोलने की योजना बना रहीं हैं. पार्टी सूत्रों की माने तो विपक्ष लामबद्ध होकर इस सत्र में प्रभावी तरीके सरकार को घेरने के लिए नए तरीके भी अपना सकता है.
सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर दान चोरी और शिवसेना और टीएमसी की टूट को लेकर सरकार पर अलोकतांत्रिक रवैया अपनाना और नीट परीक्षा लीक और आर्थिक-शैक्षिक मुद्दों को लेकर विपक्ष अभूतपूर्व हंगामा कर सकता है ,जिसमें पहले की तरह ही सदन एक बार फिर से बाधित करने की कोशिश की जाएगी.मगर सरकार के सूत्रों की माने तो, चाहे विपक्ष जितना भी हंगामा करे, इस बार केंद्र भी शेड्यूल में नियत बिल को पास करवाने के लिए हरसंभव प्रयास करेगी. वह इसलिए क्योंकि सरकार अप्रैल में गिर चुके परिसीमन विधेयक 2026 और संबंधित संविधान संशोधनों का नया ड्राफ्ट लाएगी.
लोकसभा सीटें बढ़ाकर 815 करने और 2011 जनगणना आधारित पुनर्वितरण का प्रस्ताव है. इस पर दक्षिणी राज्यों (डीएमके, और अन्य पार्टियां की चिंता बरकरार है कि उनकी सीटें घट सकती हैं.हालांकि सरकार इस पर पहले से ही सहमति बनाने की कोशिश कर रही है, लेकिन विपक्ष इसे संघीय ढांचे पर हमला बता रहा है. इस बार के सांसद के मानसून सत्र में राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं. सबसे पहले तो टीएमसी में बड़ी टूट, जिसके तहत 20 सांसदों ने अलग ग्रुप बनाकर एनडीए को समर्थन देने की घोषणा कर दी है.
वहीं शिवसेना (यूबीट) के 6 सांसदों की भी अलग ग्रुप की मांग पर स्पीकर ओम बिरला का फैसला सत्र को प्रभावित करेगा. इन ब्रेक की वजह से एनडीए की ताकत बढ़कर 318 तक पहुंच सकती है, जिससे सरकार को संविधान संशोधन पास करवाने में आसानी हो सकती है, लेकिन विपक्ष इसे ‘विपक्ष तोड़ने की साजिश’ बता रहा है. राम मंदिर दान चोरी विवाद भी विपक्ष को एक नया और गर्म मुद्दा मिल गया है. उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए विपक्षी पार्टियां इस पर भी काफी हमलावर है.
राम मंदिर ट्रस्ट में दान चोरी (दान घोटाले) की अफवाहों और हालिया खुलासों ने विवाद को काफी हवा दे दी है. सूत्रों की माने तो मानसून सत्र में विपक्ष (कांग्रेस, इंडिया ब्लॉक) इस पर चर्चा की मांग करेगा और सरकार और ट्रस्ट पर सवाल उठाएगा. भाजपा इसे राजनीतिक साजिश बताएगी.इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों के बीच बड़े टकराव की आशंका है इसके अलावा अन्य हालिया मुद्दों में सबसे प्रमुख नीट विवाद है, जो युवाओं और शिक्षा क्षेत्र से जुड़ा है. इस पर शिक्षा मंत्री के इस्तीफे भी मांगने की विपक्षी पार्टियों की योजना है.
वहीं ट्रंप टैरिफ का भारत पर असर, और रूस तेल आयात आदि मुद्दे भी सत्र में विपक्षियों के सरकार पर हमला बोलने के लिए हथियार होंगे. जिसके साथ कांग्रेस समेत राज्यों की पार्टियां एसआईआर चुनावी सुधार के मुद्दे पर भी सरकार की घेरने का मन बना रहीं है.हालांकि, पिछले सत्र के दौरान इस मुद्दे पर हंगामा करने का फायदा विपक्ष को नहीं मिला इसलिए सूत्रों कि माने तो इंडिया गठबंधन की कुछ पार्टियों में इस मुद्दे को लेकर आपस में ही एकमत नहीं है. जहां विपक्ष इन मुद्दों पर सदन में हंगामा कर सकता है, वहीं सरकार बिल पास कराने पर फोकस करेगी.
एनडीए की मजबूत स्थिति के बावजूद सत्र व्यस्त और विवादित रहने वाला है. संभावित नतीजा बहस, वॉकआउट और स्थगन जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है. वहीं, अगर सहमति बनी तो महिला आरक्षण-परिसीमन पर एकबार फिर सदन में एनडीए अपनी ताकत दिखाने की कोशिश करेगी और यदि सहमति बन जाती है तो सूत्रों के मुताबिक सरकार विपक्ष की कुछ चर्चा की मांग को मान सकती है अन्यथा सत्र बाधित हो सकता है.इस पर भाजपा के सांसद नरेश बंसल का कहना है कि, विपक्ष में अब पार्टियां ही कहां जो विरोध करे. जहां तक ममता बनर्जी का सवाल है उनकी पार्टी ने खुद उनका साथ छोड़ दिया. वहीं शिवसेना में मात्र 3 सांसद उद्धव ठाकरे के साथ है.
उन्होंने कहा कि, कांग्रेस नेता राहुल गांधी की पार्टी में इन मुद्दों को लेकर गाहे बगाहे बयानबाजी सुनी ही जा सकती है. उनकी जनता के साथ साथ खुद की पार्टी पर भी पकड़ ढीली हो चुकी है और यदि ये महिला विरोधी योजना बनाते भी हैं तो एक बार फिर आगे भी इन्हें देश की नारियां सबक सिखाएंगी.उन्होंने कहा कि, जो लोग मंदिर का मुद्दा बना रहे हैं, वे आज तक राम मंदिर नहीं गए. वैसे लोग राम का नाम लेने से डर रहे थे. वो आज मंदिर की बात कर रहे हैं. जनता उन्हें पहचानती है.
