नई दिल्लीः भारत और जापान ने आतंकवाद के लिए कमर कस ली है। दोनों देशों ने आतंकवाद पर अपनी संयुक्त स्थिति को काफी मजबूत किया है। उन्होंने सीमा-पार आतंकवाद की स्पष्ट रूप से निंदा की है और पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है। 16वें भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में यह बात कही गई है।
भारत-जापान की तरफ से दिल्ली में जारी द्विपक्षीय बयान में कहा गया है कि आतंकवाद और हिंसक चरमपंथ के सभी रूपों और तरीकों की कड़ी निंदा की गई। दोनों देशों ने खास तौर पर पहलगाम आतंकवादी हमले और ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का जिक्र किया और मांग की कि इसके दोषियों, आयोजकों, फंड देने वालों और प्रायोजकों को सजा दिलाई जाए।बयान में इस बात पर भी जोर दिया गया कि आतंकवादी हमलों को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जा सकता और न ही जोड़ा जाना चाहिए; साथ ही, आतंकवाद से निपटने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया गया।
आतंकवाद पर सख्त रुख के साथ-साथ रक्षा, टेक्नोलॉजी और आर्थिक सुरक्षा के क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग का भी बड़े पैमाने पर विस्तार हुआ। भारत और जापान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जरूरी मिनरल्स, सेमीकंडक्टर, साफ ऊर्जा और मजबूत सप्लाई चेन से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दोनों देशों ने अपने पहले रक्षा सह-विकास प्रोजेक्ट और रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ाने की घोषणा की। साथ ही, वे लंबी अवधि की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम उभरती टेक्नोलॉजी में सहयोग को और गहरा करने पर भी सहमत हुए।
सम्मेलन में रक्षा आदान-प्रदान को मजबूत करने, समुद्री सहयोग बढ़ाने और औद्योगिक साझेदारी को और मजबूत करने के महत्व को फिर से दोहराया गया, क्योंकि दोनों देश ज्यादा मजबूत रणनीतिक क्षमताएं विकसित करना चाहते हैं।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को जापान की ओर से रक्षा उपकरण और तकनीक के ट्रांसफर से जुड़े तीन सिद्धांतों की समीक्षा का स्वागत किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इससे भारत और जापान के बीच रक्षा साझेदारी मजबूत होगी।
यह बात 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में कही गई। यह बैठक नई दिल्ली में हुई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची शामिल हुईं।दोनों देशों ने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में उनका सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पीएम मोदी और ताकाइची दोनों ने पिछले वार्षिक शिखर सम्मेलन में अपनाए गए सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा के आधार पर इस साझेदारी को और मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
