आसिम मुनीर ट्रंप प्रशासन के लिए खतरा

नई दिल्ली। पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, पहले ऐसे विदेशी नेता हैं, जिन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष बढ़ने के बाद तेहरान का दौरा किया। मुनीर के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और ईरान के सैन्य नेतृत्व, दोनों के साथ करीबी संबंध है।

फॉक्स न्यूज डिजिटल के अनुसार, ऐसा इसलिए है क्योंकि जब मुनीर 2016 और 2017 में पाकिस्तान मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल के तौर पर काम कर रहे थे, तब उन्होंने ईरान के साथ संबंध मजबूत करना शुरू कर दिया था।रिटायर्ड पाकिस्तानी जनरल अहमद सईद बताया, ‘वह वहां के नेतृत्व से बातचीत करते रहे हैं। वह वहां की इंटेलिजेंस कम्युनिटी के साथ बातचीत करते रहे हैं। वह इस्लामिल रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के साथ बातचीत कर रहे हैं।’

सईद ने कहा कि IRGC के अलावा, मुनीर के ईरान की रेगुलर सेना और उनकी इंटेलिजेंस के साथ भी संबंध है। उनके अनुसार, मुनीर के IRGC की कुर्द फोर्स के पूर्व कमांडर कासिम सुलेमानी और कमांडर हुसैन सलामी के साथ करीबी संबंध थे।सईद ने कहा, ‘वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ऐसी हस्ती बने हुए हैं, जिनके ईरान की इंटेलिजेंस कम्युनिटी, ईरान के सैन्य नैतृत्व, ईरान के राजनयिक समुदाय और वहां के राजनीतिक नेतृत्व के साथ भी निजी बातचीत और निजी समीकरण हैं।’

फॉउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के सीनियर फेलो बिल रोगियो ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए और मुनीर के IRGC से संबंध अमेरिका के लिए रेड फ्लैग हैं।रोगियो ने दावा किया कि ट्रंप को पाकिस्तानियों पर भरोसा नहीं करना चाहिए। अफगानिस्तान में पाकिस्तान एक धोखेबाज सहयोगी था, जो हमारे दोस्त होने का दिखावा करते हुए तालिबान का समर्थन करता रहा था। मुनीर के IRGC के साथ संबंध ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा रेड फ्लैग होना चाहिए।

वहीं पाकिस्तानी विश्लेषक रजा रूमी ने कहा कि मुनीर जैसी हस्तियों का उभार सिर्फ यह दिखाता है कि पाकिस्तान में सेना किस तरह नागरिक नेतृत्व पर लगातार हावी होती जा रही है।मुनीर ने शनिवार को ईरान का तीन-दिवसीय दौरा पूरा किया, जिसका मकसद शांति समझौता पक्का करना था। पाकिस्तानी सेना के एक बयान के मुताबिक, तेहरान के तीन-दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व और शांति वार्ताकारों से मुलाकात की।

मुनीर ने शनिवार को ईरान का तीन-दिवसीय दौरा पूरा किया, जिसका मकसद शांति समझौता पक्का करना था। पाकिस्तानी सेना के एक बयान के मुताबिक, तेहरान के तीन-दिवसीय दौरे के दौरान उन्होंने ईरान के शीर्ष नेतृत्व और शांति वार्ताकारों से मुलाक़ात की। उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति, विदेश मंत्री, संसद के स्पीकर और ईरान के सैन्य केंद्रीय कमान केंद्र के प्रमुख से बातचीत की।

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