बाघों के शिकार मामले में अलर्ट

देहरादून: हरिद्वार डिवीजन में बाघों के शिकार के मामले ने वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. दो बाघों की संदिग्ध मौत के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब केवल हरिद्वार ही नहीं बल्कि देहरादून और आसपास के वन क्षेत्रों में भी हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है. वन विभाग की टीमें लगातार जंगलों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं और खासतौर पर जंगलों में रहने वाले गुर्जरों के डेरों पर पूछताछ की जा रही है.

दरअसल, हरिद्वार डिवीजन में हाल ही में दो युवा बाघों के शव बरामद हुए थे. शुरुआती जांच में शिकार की आशंका जताई जा रही है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि एक बाघिन अब तक लापता बताई जा रही है, जिससे वन विभाग की चिंता और बढ़ गई है. आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा मामला संगठित शिकार गिरोह से जुड़ा हो सकता है. इसी कड़ी में कुछ संदिग्ध लोगों की पहचान भी की गई है. वन विभाग की कार्रवाई के दौरान जिन गुर्जरों पर संलिप्तता की आशंका जताई गई थी, उनमें से एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरा आरोपी अभी फरार चल रहा है. फरार आरोपी की तलाश के लिए लगातार जंगलों और आसपास के क्षेत्रों में दबिश दी जा रही है.

वन विभाग को आशंका है कि आरोपी देहरादून डिवीजन के किसी क्षेत्र में छिपा हो सकता है. यही वजह है कि देहरादून डिवीजन में भी सघन चेकिंग अभियान शुरू कर दिया गया है.देहरादून डिवीजन का क्षेत्र काफी विस्तृत माना जाता है. यह ऋषिकेश से लेकर विकासनगर तक फैला हुआ है और इसकी सीमाएं राजाजी टाइगर रिजर्व से भी जुड़ी हुई हैं.

यही कारण है कि इस पूरे क्षेत्र में वन्यजीवों की अच्छी खासी मौजूदगी रहती है. यहां बाघ, हाथी, गुलदार समेत कई संवेदनशील वन्यजीव पाए जाते हैं. इसके अलावा जंगलों के भीतर बड़ी संख्या में गुर्जर परिवार भी डेरों में निवास करते हैं, जिससे वन विभाग के लिए निगरानी और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है. वन विभाग की टीमें फिलहाल जंगलों में लगातार पेट्रोलिंग कर रही हैं. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है और बाहरी लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है.

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अवैध गतिविधि को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और तुरंत कार्रवाई की जाएगी. देहरादून डिवीजन के ऋषिकेश क्षेत्र में फिलहाल एक बाघ और एक बाघिन की सक्रिय मौजूदगी बताई जा रही है. इसके अलावा हाथियों के झुंड और लेपर्ड की गतिविधियां भी यहां लगातार देखी जाती हैं. ऐसे में वन विभाग किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है.

अधिकारियों ने सभी रेंज अधिकारियों और वन कर्मियों को गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं. खासतौर पर रात के समय निगरानी और अधिक सख्त की जा रही है. वन विभाग का मानना है कि यदि समय रहते सख्ती नहीं बरती गई तो वन्यजीवों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है. यही वजह है कि विभाग ने कई स्तरों पर निगरानी बढ़ा दी है. जंगलों में आने-जाने वाले रास्तों पर भी नजर रखी जा रही है और स्थानीय स्तर पर सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत मिल सके.

देहरादून के डीएफओ नीरज शर्मा ने कहा कि वन विभाग की ओर से सामान्य दिनों में भी लगातार पेट्रोलिंग की जाती है, लेकिन हरिद्वार में सामने आए मामले के बाद अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है. उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है और जंगलों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी.

डीएफओ नीरज शर्मा के मुताबिक वन्यजीवों की सुरक्षा विभाग की प्राथमिकता है और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जा रहा है. फिलहाल विभाग की टीम लगातार इलाके में सर्च ऑपरेशन चला रही है. उत्तराखंड जैसे राज्य में बाघों का संरक्षण बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां के जंगल देश के महत्वपूर्ण टाइगर कॉरिडोर का हिस्सा माने जाते हैं. ऐसे में शिकार की घटनाएं न केवल वन्यजीव संरक्षण के लिए खतरा हैं बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकती हैं. फिलहाल पूरे मामले पर वन विभाग की नजर बनी हुई है और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी खुलासे हो सकते हैं.

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