टेंशन बढ़ा रहे ऑनलाइन बाल यौन शोषण के मामले

देहरादून: उत्तराखंड में बच्चों से संबंधित ऑनलाइन यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री के मामलों को गंभीरता से लेते हुए एसटीएफ (स्पेशल टास्स फोर्स) साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है. साल 2026 के दौरान केवल मई महीने में एनसीएमईसी (National Center for Missing & Exploited Children) से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर करीब एक दर्जन एफआईआर दर्ज की गईं. वही जून 2026 एक महीने के दौरान ही 52 एफआईआर दर्ज कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जा रही हैं.

दरअसल, यह बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स और अलग-अलग ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों का दुरुपयोग कर बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री का प्रसारण, संग्रहण और साझा करने जैसी गतिविधियां बढ़ रही हैं. ऐसे अपराधों के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है और प्रत्येक मामले में विधिक कार्रवाई करते हुए आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने की प्रक्रिया लगातार जारी है.

किसी भी प्रकार की बाल अश्लीलता (Child Sexual Abuse Material) से संबंधित फोटो, वीडियो या लिंक को डाउनलोड, संग्रहित अथवा किसी अन्य व्यक्ति को साझा न करें.सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, क्लाउड स्टोरेज और मोबाइल उपकरणों का उपयोग करते समय सतर्क रहें और बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर अभिभावक नियमित निगरानी रखें.

यदि किसी व्यक्ति को बच्चों से संबंधित आपत्तिजनक सामग्री, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि अथवा किसी प्रकार का साइबर अपराध दिखाई देता है, तो तत्काल इसकी सूचना निकटतम पुलिस स्टेशन, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें.इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है.अभिभावक बच्चों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, अजनबियों से ऑनलाइन बातचीत के जोखिम व निजी जानकारी साझा न करने के बारे में जागरूक करें.

वहीं, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने जनता से अपील की है कि साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहें और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी का परिचय दें. किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को देकर सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल समाज के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान करें.

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