60 दिनों का पेट्रोल-डीजल और 45 दिनों की रसोई गैस बाकी !

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में कारण के कारण दुनियाभर में कच्चे तेल का संकट पैदा हो गया है। इससे भारत भी अछूता नहीं रहा है। हालांकि भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार है। देश में फिलहाल 60 दिनों का तेल भंडार, 60 दिनों का प्राकृतिक गैस भंडार और 45 दिनों का रसोई गैस भंडार उपलब्ध है। सरकार ने यह जानकारी दी। सरकार ने कहा कि फ्यूल सप्लाई की राशनिंग की कोई योजना नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के चलते आयात पर असर पड़ा है। इसके बावजूद एलपीजी का भी पूरा इंतजाम किया गया है और घरेलू उपभोक्ताओं को पूरी सप्लाई की जा रही है। तेल और गैस मंत्रालय में सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है। युद्ध के बावजूद करीब 60 दिनों का पेट्रोल-डीजल का भंडार है और लगभग 45 दिनों का एलपीजी भंडार मेंटेन किया जा रहा है। विभिन्न देशों से खरीद बढ़ाई गई है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 703 अरब डॉलर के मजबूत स्तर पर बना हुआ है। साथ ही सरकार ने बताया कि भारत तेल शोधन करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है और चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक भी है। भारत वर्तमान समय में 150 से अधिक देशों को निर्यात कर रहा है तथा घरेलू मांग भी पूरी की जा रही है।भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल शोधक और पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है। भारत 150 से अधिक देशों को निर्यात करता है और घरेलू मांग को पूरी तरह से पूरा कर रहा है।

राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को पश्चिम एशिया की स्थिति पर गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की पांचवीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में बताया गया कि पश्चिम एशिया संकट के बावजूद भारत में पिछले 70 दिनों से पेट्रोलियम कीमतों को स्थिर रखा गया है, जबकि कई देशों में कीमतों में 30 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारतीय तेल कंपनियां प्रतिदिन लगभग 1000 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रही हैं।वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में नुकसान करीब 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है।
इसके बावजूद सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों का पूरा बोझ आम नागरिकों पर न पड़े।

बैठक में राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान में ईंधन संरक्षण केवल तत्काल बचत के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की दीर्घकालिक क्षमता निर्माण और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि संकट लंबा चलता है तो अपनी तैयारी बनाए रखने के लिए अभी से जिम्मेदार तरीके से खपत की संस्कृति विकसित करना आवश्यक है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से मेट्रो और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग करने, गाड़ी शेयर करने, अनावश्यक विदेशी यात्राओं से बचने, घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी सोने की खरीद एक वर्ष तक टालने की अपील की है। पीएम मोदी ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 प्रतिशत तक कमी लाने, प्राकृतिक खेती अपनाने तथा डीजल पंपों के स्थान पर सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई पंपों का उपयोग बढ़ाने का आग्रह भी किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *