नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भीषण भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है. रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ से भारत आने वाला एक और एलपीजी टैंकर ‘ग्रीन साल्वी’ सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पर आगे बढ़ गया है. यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं.
सूत्रों के अनुसार, ‘ग्रीन साल्वी’ 46,000 मीट्रिक टन से अधिक लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर भारत की ओर आ रहा है. विशेष बात यह है कि यह टैंकर अकेला नहीं है, बल्कि तीन भारतीय एलपीजी जहाजों के एक काफिले का नेतृत्व कर रहा है. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय तनाव के बीच, यह सातवां अवसर है जब कोई भारतीय पोत इस खतरनाक चोकपॉइंट को पार करने में सफल रहा है.
इस सुरक्षित मार्ग के पीछे भारत की सक्रिय ‘ऊर्जा कूटनीति’ का बड़ा हाथ माना जा रहा है. तेहरान और नई दिल्ली के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक वार्ताओं के बाद, ईरान ने इन जहाजों को “मित्र राष्ट्र” के पोत के रूप में मान्यता दी है. ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने इन जहाजों के पारगमन की सुविधा प्रदान की है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का प्रमाण है.
टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘ग्रीन साल्वी’ और उसके साथ चल रहे अन्य जहाज ओमान के तट के करीब ‘दक्षिणी मार्ग’ का उपयोग कर रहे हैं. सामान्य तौर पर जहाज उत्तरी लेन का उपयोग करते हैं, जो ईरानी नियंत्रण के अधिक करीब होती है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, दक्षिणी मार्ग को अधिक सुरक्षित माना जा रहा है, जिससे किसी भी संभावित टकराव या अप्रिय घटना से बचा जा सके.
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है. ‘ग्रीन साल्वी’ की सफल यात्रा से घरेलू बाजार में रसोई गैस की आपूर्ति को स्थिरता मिलेगी. ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आपूर्ति बाधित होती, तो घरेलू स्तर पर कीमतों में उछाल और किल्लत की स्थिति पैदा हो सकती थी.
पश्चिम एशिया में तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद, भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने में सफलता पाई है. अगले कुछ घंटों में दो और भारतीय एलपीजी वाहकों के इस जलडमरूमध्य को पार करने की उम्मीद है.
