नई दिल्लीः भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष की गहराइयों से आने वाले एक अनोखे रेडियो सिग्नल का पता लगाया है जो हर 20 से 30 मिनट के अंतराल पर धड़क रहा है. रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और पुणे के जीएमआरटी की टीम इस पहेली को सुलझाने में जुटी है कि आखिर हमारी आकाशगंगा के पास से ये संकेत कौन भेज रहा है. वैज्ञानिकों ने एम74 एक्स-1 नामक सोर्स से ऊर्जा के जबरदस्त विस्फोट होते देखे हैं जो एक निश्चित समय के बाद बार-बार दोहराए जा रहे हैं. आमतौर पर मिलने वाले सिग्नल कुछ ही सेकंड के होते हैं लेकिन यह नया सिग्नल हर आधे घंटे में आता है और कई मिनटों तक सक्रिय रहता है.
जब भी कोई सटीक अंतराल वाला सिग्नल मिलता है तो एलियंस की चर्चा शुरू हो जाती है लेकिन वैज्ञानिक इसे एक अल्ट्रा-लॉन्ग पीरियड मैग्नेटर मान रहे हैं. यह एक मृत तारे का अवशेष हो सकता है जिसका चुंबकीय क्षेत्र बहुत शक्तिशाली है और यह धीरे-धीरे घूमते हुए रेडियो तरंगें छोड़ रहा है.इस बड़ी खोज में पुणे स्थित जायंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप यानी जीएमआरटी का सबसे अहम रोल रहा है जो दुनिया के सबसे संवेदनशील टेलिस्कोप में से एक है. भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी देसी तकनीक के जरिए इन सिग्नलों को पकड़ा और उनकी फ्रीक्वेंसी की बारीकी से जांच की जिससे नई जानकारी मिली.
एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह खोज ब्रह्मांड और तारों के अंत के बारे में हमारी पुरानी समझ को पूरी तरह से बदल सकती है. वैज्ञानिक हैरान हैं कि यह पिंड इतनी ऊर्जा कैसे पैदा कर रहा है कि करोड़ों मील दूर पृथ्वी पर भी इसके धमाके साफ सुनाई दे रहे हैं.भारतीय वैज्ञानिक अब इस सिग्नल का और भी गहराई से अध्ययन कर रहे हैं ताकि अंतरिक्ष के पुराने सवालों के सटीक जवाब मिल सकें. अगर यह कोई नई खगोलीय घटना साबित होती है तो स्पेस साइंस के क्षेत्र में भारत के नाम एक नया और सुनहरा अध्याय जुड़ जाएगा.
