वैदिक मंत्रोच्चार के साथ खुले मद्महेश्वर मंदिर के कपाट

रुद्रप्रयाग: द्वितीय केदार के नाम से विख्यात मद्महेश्वर मंदिर के कपाट आज 21 मई यानि आज 11.30 बजे कर्क लग्न में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत खोल दिए गए हैं. कपाटोत्सव के अवसर पर मंदिर को रंग बिरंगे फूलों से सजाया गया था, इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भगवान मद्महेश्वर के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया.

गौर हो कि आज मद्महेश्वर मंदिर के कपाट विधि-विधान से श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं. कपाट खुलने के अवसर पर अपने जारी संदेश में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान मद्महेश्वर का आशीर्वाद सभी भक्तों पर बना रहे. वहीं बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ ने बताया कि मद्महेश्वर यात्रा हेतु समिति के स्तर पर व्यापक तैयारियां की गयी हैं. वहीं बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मद्महेश्वर जी की चल विग्रह डोली 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी.

20 मई को डोली हकहकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची तथा आज प्रातः गौंडार से प्रस्थान कर मद्महेश्वर धाम पहुंची. निर्धारित तिथि 21 नवंबर यानि आज 11.30 बजे भगवान मद्महेश्वर जी के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खुल गये. जबकि 19 मई को ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ से समारोह पूर्वक रावल भीमाशंकर लिंग तथा ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने भगवान मद्महेश्वर की चल विग्रह डोली को प्रस्थान कराया था. ओंकारेश्वर मंदिर प्रभारी बिजेंद्र बिष्ट ने बताया कि आज 1135 श्रद्धालु मद्महेश्वर धाम दर्शन को पहुंचे है. कपाट खुलने की प्रक्रिया के अंतर्गत पुजारी शिवशंकर लिंग ने विधिवत पूजा-अर्चना एवं कपाट खुलने की प्रक्रिया संपन्न कराई.

इस दौरान भगवान महेश्वर के स्वयंभू शिवलिंग को समाधि रूप से श्रृंगार रूप प्रदान किया इससे पहले भगवान मद्महेश्वर जी की चलविग्रह डोली ने भंडार कक्ष तक अवलोकन को पहुंची. इस अवसर पर मंदिर समिति सदस्य प्रह्लाद पुष्पवान, दानीदाता दिनेश कानोड़िया,डोली प्रभारी किशन त्रिवेदी, वीरेश्वर भट्ट, विशेश्वर भट्ट, दिनेश पंवार गणेश सेमवाल प्रकाश पंवार सहित स्थानीय हकहकूकधारी, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे. वहीं मद्महेश्वर मंदिर के कपाट खुलने के बाद यात्रा पड़ावों पर रौनक लौटने लगी है. जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी खुल रहे हैं.

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